रिकॉर्ड रूम की बदहाली पर भड़का सिविल बार एसोसिएशन, डीएम को सौंपा 7 सूत्रीय ज्ञापन
अव्यवस्था, कर्मचारियों की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई आवाज, व्यवस्था सुधार की मांग
संतकबीरनगर। कलेक्ट्रेट स्थित राजस्व अभिलेखागार (रिकॉर्ड रूम) में व्याप्त अव्यवस्था, कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और आमजन को हो रही परेशानियों को लेकर सिविल बार एसोसिएशन का आक्रोश खुलकर सामने आया है। अधिवक्ताओं ने अभिलेखागार की बदहाल व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए जिलाधिकारी को 7 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है।
सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ईश्वर प्रसाद पाठक एवं महामंत्री निरंजन सिंह द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि अभिलेखागार में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से हाल ही में किए गए पटल परिवर्तन का संगठन स्वागत करता है, लेकिन इसके बाद रिकॉर्ड रूम की कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावित हो गई है। महत्वपूर्ण अभिलेखों की जानकारी रखने वाले अनुभवी कर्मचारियों के स्थान पर नए और अनुभवहीन कर्मचारियों की तैनाती से किसानों, वादकारियों और अधिवक्ताओं को आवश्यक अभिलेखों एवं नकलों की प्राप्ति में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कई कर्मचारी अपने निर्धारित पटल पर उपलब्ध नहीं रहते हैं। जानकारी लेने पर वे संतोषजनक उत्तर देने के बजाय जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करते हैं। इससे न्यायिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं तथा मुकदमों के समयबद्ध निस्तारण में भी बाधा उत्पन्न हो रही है।
बार एसोसिएशन ने मांग की है कि रिकॉर्ड रूम में पुराने अभिलेखों की जानकारी रखने वाले अनुभवी कर्मचारियों की तत्काल तैनाती की जाए। साथ ही जनसेवा में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संगठन ने पिछले दो महीनों में प्राप्त आवेदनों, जारी की गई नकलों तथा लंबित प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग उठाई है।
ज्ञापन में अभिलेखागार में कथित रूप से धन लेकर नकल जारी किए जाने की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। संगठन ने आरोपों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा नकल निर्गमन की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की मांग की है।
सिविल बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो किसानों, वादकारियों और अधिवक्ताओं की समस्याएं और बढ़ेंगी, जिससे प्रशासनिक एवं न्यायिक कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। संगठन ने जिलाधिकारी से जनहित में तत्काल हस्तक्षेप कर अभिलेखागार की व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाने की मांग की है।















