भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगी श्रीमद्भागवत कथा, उमड़ा आस्था का जनसैलाब
चौक बाजार सर्राफा समिति के आयोजन ने बिखेरी आध्यात्मिक छटा, भव्य शोभायात्रा बनी आकर्षण का केंद्र
मथुरा। धर्मनगरी मथुरा में चौक बाजार सर्राफा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बनकर उभरा। अग्रवाटिका, मसानी लिंक रोड पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। कथा स्थल पर पूरे सप्ताह भक्ति, उल्लास और धार्मिक आस्था का अनुपम वातावरण बना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत 23 मई को महिलाओं के मेहंदी उत्सव के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और युवतियों ने सहभागिता की। भक्ति गीतों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और धार्मिक आयोजनों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।
24 मई को स्वामी घाट से निकली भव्य शोभायात्रा आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। नासिक बैंड, प्रकाश बैंड और इस्कॉन भक्तों के हरिनाम संकीर्तन से पूरा शहर कृष्णमय हो उठा। 101 महिलाओं की कलश यात्रा ने शोभायात्रा की गरिमा को और बढ़ाया। श्रद्धालु भगवान के जयघोष करते हुए पूरे मार्ग में नृत्य और भजन-कीर्तन में मग्न दिखाई दिए।
शोभायात्रा में बालकृष्ण प्रभु का सुसज्जित डोला विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कथा व्यास परम पूज्य श्री रमाकांत जी गोस्वामी महाराज स्वयं कीर्तन करते हुए भक्तों के साथ शोभायात्रा का नेतृत्व कर रहे थे। मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत किया।
कथा के दौरान आचार्य श्री रमाकांत जी गोस्वामी महाराज ने श्रीमद्भागवत महात्म्य, भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, धर्म, भक्ति और मानव जीवन के आदर्शों का अत्यंत भावपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक वर्णन किया। उनकी अमृतमयी वाणी सुन श्रद्धालु भावविभोर होते रहे।
27 मई को आयोजित नंदोत्सव में भक्तों का उत्साह चरम पर रहा। नंद बाबा की बधाइयों और कृष्ण जन्मोत्सव की झांकियों के बीच श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों पर जमकर नृत्य किया। इसके बाद गोवर्धन पूजा और श्री रुक्मिणी विवाह महोत्सव भी श्रद्धा एवं उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
30 मई को श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन हुआ, जबकि 31 मई को आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
आयोजन को सफल बनाने में राजेंद्र बंसल (भगत जी), चंद्रमोहन, राकेश, मुकेश, अरविंद, रितेश, हेमंत, अनुराग, तुलसी गर्ग, अजय, गिरधारी, अनिल पंडित, किशोर चौधरी, वीरेंद्र चौधरी, देवेश विशाल, मुरारीलाल, संजय बुलियन, मनोज, कन्हैया, राजकुमार, गौरव मेडिकल सहित अनेक श्रद्धालुओं और सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपराओं के संरक्षण का भी प्रेरणादायी उदाहरण साबित हुआ।















