मिशन शक्ति फेज-5 के तहत महिला थाना टीम ने चलाया जागरूकता अभियान
महिलाओं को हेल्पलाइन, साइबर सुरक्षा और नए आपराधिक कानूनों की दी जानकारी, 50 लोगों से पूछताछ
बस्ती। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिशन शक्ति फेज-5 के तहत बुधवार को बस्ती में महिला थाना पुलिस ने व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देश, अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी सदर सत्येंद्र भूषण तिवारी के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक महिला थाना डॉ. शालिनी सिंह के नेतृत्व में अभियान संचालित किया गया।
महिला थाना टीम में महिला आरक्षी गोल्डी वर्मा, नेहा वर्मा एवं दीक्षा शुक्ला शामिल रहीं। टीम ने गायत्री मंदिर, कटेश्वर पार्क, जिला अस्पताल, रोडवेज बस स्टेशन तथा अन्य भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर भ्रमण कर महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
अभियान के दौरान महिलाओं को मिशन शक्ति (नारी सुरक्षा, नारी सम्मान एवं नारी स्वावलंबन) के उद्देश्यों से अवगत कराया गया। साथ ही आपात स्थिति में उपयोगी हेल्पलाइन नंबर 1090 (महिला पावर लाइन), 181 (महिला हेल्पलाइन), 112 (आपातकालीन सेवा), 1076 (मुख्यमंत्री हेल्पलाइन), 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन) और 108 (एम्बुलेंस सेवा) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
महिला थाना टीम ने बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए महिलाओं को ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, ओटीपी साझा करने, सोशल मीडिया धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा के प्रति भी जागरूक किया। साइबर अपराध होने पर तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई।
इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों ने हाल ही में लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 के प्रमुख प्रावधानों की भी जानकारी दी और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस से तत्काल संपर्क करने की सलाह दी।
अभियान के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर बिना कारण घूम रहे लगभग 50 व्यक्तियों से पूछताछ की गई। सत्यापन के बाद संदिग्ध गतिविधि न मिलने पर 30 व्यक्तियों को भविष्य में अनावश्यक रूप से सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ लगाने से बचने की सख्त हिदायत देकर छोड़ दिया गया।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य केवल महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि उन्हें उनके अधिकारों, कानूनी सहायता और आत्मरक्षा के प्रति भी जागरूक बनाना है। ऐसी जागरूकता गतिविधियां आगे भी लगातार जारी रहेंगी।















