ज्ञान, वैराग्य, धर्म, ऐश्वर्य, यश और श्री जिसमें नित्य निवास करें, वही भगवान : त्रिभुवन दास जी महाराज
भिटहा में चल रही भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण बाल लीलाओं से भाव-विभोर हुए सैकड़ों श्रोता
संतकबीरनगर। “भग छः होते हैं – ज्ञान, वैराग्य, धर्म, ऐश्वर्य, यश और श्री। जिनमें ये छः नित्य निवास करते हैं, वही भगवान कहलाते हैं।” यह अमृत वचन सोमवार को भिटहा स्थित “चतुर्वेदी विला में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास त्रिभुवन दास जी महाराज ने कहे।
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का रसपान कराते हुए महाराज जी ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।महाराज जी ने कहा कि पूतना अविद्या का प्रतीक है, शकटासुर जड़वाद का, तृणावर्त चंचलता का, वत्सासुर पशुबुद्धि का, बकासुर दंभ का, अघासुर पाप का, धेनुकासुर देहाभिमान का और कालिय नाग भोग-शक्ति रूपी विष का। भगवान ने बाल लीलाओं में इन सबका उद्धार कर संसार को बुराइयों से मुक्त होने का मार्ग दिखाया।
कथा से पूर्व चतुर्वेदी परिवार ने कथाव्यास त्रिभुवन दास जी महाराज को पगड़ी पहनाकर अभिनंदन किया।
महाराज जी ने मुख्य यजमान चंद्रावती देवी के साथ डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी, राकेश चतुर्वेदी, राजन चतुर्वेदी, रजत चतुर्वेदी सहित जनार्दन चतुर्वेदी, जय चौबे, रत्नेश चतुर्वेदी, डॉ सत्यम चतुर्वेदी, दिव्येश आदि को ताज-स्वरूप पगड़ी पहनाकर आशीर्वाद दिया।स्व. पंडित सूर्य नारायण चतुर्वेदी की स्मृति में आयोजित इस कथा में गोमती चतुर्वेदी, सविता चतुर्वेदी, शिखा चतुर्वेदी, शरद त्रिपाठी, मायाराम पाठक, अभयानंद सिंह, मुमताज अहमद, अजय पांडेय, निहाल चन्द पांडेय, प्रेम प्रकाश पांडेय, नितेश द्विवेदी, आशुतोष पांडेय, दिग्विजय यादव, बृजेश चौधरी, आनंद ओझा सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा का समापन 11 दिसंबर को होगा।















