भिटहा में भागवत कथा: “प्रेम में अपना सुख नहीं, प्रियतम को सुख देना ही सच्चा प्रेम है” – त्रिभुवन दास जी महाराज

भिटहा में भागवत कथा: “प्रेम में अपना सुख नहीं, प्रियतम को सुख देना ही सच्चा प्रेम है” – त्रिभुवन दास जी महाराज

संतकबीरनगर।

भिटहा स्थित “चतुर्वेदी विला” में स्वर्गीय पंडित सूर्य नारायण चतुर्वेदी की पुण्य स्मृति में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन मंगलवार को वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास त्रिभुवन दास जी महाराज ने रुक्मिणी विवाह के बाद गोपियों के विरह और महारास की दिव्य लीला का भावपूर्ण वर्णन किया। पूरा पांडाल गोपियों के निश्छल प्रेम में डूब गया।

त्रिभुवन दास जी महाराज ने कहा,  

“वासना और प्रेम का बाहरी रूप एक सा दिखता है, इसलिए महारास पर भ्रम होता है। लेकिन प्रेम में स्वसुख की अपेक्षा नहीं होती। प्रियतम को सुख पहुँचाना ही सच्चे प्रेमी का लक्षण है। गोपियों का प्रेम ऐसा ही था – बिना किसी अपेक्षा के, केवल श्रीकृष्ण को सुख देने का भाव।”

कथा व्यास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने 16,108 कन्याओं से विवाह किया, जो वास्तव में वेद की 16,108 ऋचाएँ थीं। उपासना कांड की ये ऋचाएँ गृहस्थों के लिए हैं और भगवान के अंश में समाहित होकर अपने मूल तत्व में लीन हो गईं।

उद्धव-गोपी संवाद का प्रसंग सुनाते हुए महाराज जी ने कहा, “ज्ञान मार्गी उद्धव को अपने ज्ञान का बड़ा अभिमान था, लेकिन गोपियों के विरह-वेदना और निष्काम प्रेम को देखकर वे स्वयं उसी भक्ति में डूब गए। यही भक्ति का चरम है।”

महाराज जी ने कंस वध को आतंक का अंत और द्वारिका को विश्वकर्मा द्वारा निर्मित दिव्य नगरी बताया। उन्होंने कहा, “महारास जीवात्मा और परमात्मा का पावन मिलन है, काम के पराभव की लीला है।”

कथा के पूर्व गणेश पांडेय, नीलमणि पांडेय, बद्री प्रसाद यादव, ब्रह्म शंकर भारती सहित अनेक गणमान्य लोगों ने व्यास पीठ का दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

मुख्य यजमान चंद्रावती देवी के नेतृत्व में पूर्व विधायक दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे, सूर्या ग्रुप चेयरमैन डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी, पूर्व प्रमुख राकेश चतुर्वेदी, रत्नेश चतुर्वेदी, डॉ. सत्यम चतुर्वेदी, दिव्येश चतुर्वेदी, रजत चतुर्वेदी एवं जनार्दन चतुर्वेदी ने व्यास जी की भव्य आरती उतारी और तिलक किया।

कथा में जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव, सविता चतुर्वेदी, शिखा चतुर्वेदी, निहाल चंद्र पांडेय, वेद प्रकाश पांडेय, पवन पांडेय, मनोज पांडेय, मायाराम पाठक, जय प्रकाश यादव सहित सैकड़ों श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते-गाते रहे। आठवें दिन की कथा में पूतना उद्धार एवं सुदामा चरित्र की चर्चा होगी।

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