सोशल मीडिया: संतकबीरनगर में संजीवनी बनकर उभरा, मेटा अलर्ट पर पुलिस ने 8 माह में बचाई 9 जिंदगियां।

सोशल मीडिया: संतकबीरनगर में संजीवनी बनकर उभरा, मेटा अलर्ट पर पुलिस ने 8 माह में बचाई 9 जिंदगियां।

संतकबीरनगर। तकनीकी युग में सोशल मीडिया को अक्सर नकारात्मक प्रभावों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन संतकबीरनगर में यह संजीवनी बनकर उभरा है। मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी) के अलर्ट सिस्टम और पुलिस की तत्परता ने 1 जनवरी से 6 सितंबर 2025 तक 8 महीनों में 9 युवक-युवतियों और किशोरों की जान बचाई। यह उपलब्धि तकनीक और मानवता के सकारात्मक समन्वय का जीवंत उदाहरण है।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने बताया कि मेटा के साथ 2022 से चली आ रही साझेदारी के तहत आत्महत्या संबंधी पोस्ट की सूचना तुरंत पुलिस को मिलती है। सोशल मीडिया सेंटर अलर्ट को संबंधित थाने तक पहुंचाता है, जिसके बाद पुलिस त्वरित कार्रवाई करती है। इस दौरान काउंसलिंग, लिखित माफीनामा और परिजनों को जागरूक करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। मीना ने चेतावनी दी कि आत्मघाती पोस्ट डालने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई भी हो सकती है।

जांच में सामने आया कि प्रेम-प्रसंग, रील बनाने की होड़ और पारिवारिक तनाव के कारण युवा आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। 6 जनवरी को धनघटा के 21 वर्षीय युवक ने प्रेमिका से बात न होने पर फेसबुक पर जहर खाने की पोस्ट डाली। 18 और 22 जनवरी को बखिरा के 14 वर्षीय छात्र और 20 वर्षीय छात्रा ने क्रमशः प्रेम-झगड़े और रील बनाने के चक्कर में आत्महत्या की पोस्ट डाली। 24 मार्च को 16 वर्षीय किशोरी ने दोस्त से कहासुनी के बाद इंस्टाग्राम पर दवा खाने की सूचना दी। 4 और 9 अप्रैल को महुली और खलीलाबाद के युवकों ने मानसिक तनाव और प्रसिद्धि के लिए आत्मघाती पोस्ट डाले। 10 और 13 जून को खलीलाबाद और धनघटा के युवाओं ने रील और तनाव के कारण आत्महत्या की कोशिश की। हर बार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर जान बचाई।

मनोवैज्ञानिक डॉ. मंजू मिश्रा ने कहा कि परिवार में संवाद और सहनशीलता की कमी युवाओं को चरम कदम की ओर धकेल रही है। अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने और मित्रवत व्यवहार अपनाने की सलाह दी। यह पहल न केवल जिंदगियां बचा रही है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और पुलिस की संवेदनशीलता को भी रेखांकित करती है।

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