50 साल से भजन-गजल के सुरों में बस्ती गंगा-जमुनी तहजीब: अब्दुल कलाम की भक्ति राग
संतकबीरनगर में अब्दुल कलाम की मंडली ने बिखेरा भक्ति का रंग।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पुलिस लाइन में मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति।
यूपी से मुंबई तक, गायकी से जीता लाखों का दिल।
संतकबीरनगर। 65 वर्षीय अब्दुल कलाम ने अपनी भजन-गजल की गायकी से पिछले 50 सालों से गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल पेश की है। महुली थाना क्षेत्र के मानपुर गांव के निवासी अब्दुल कलाम ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शनिवार रात पुलिस लाइन में हारमोनियम की संगत में भजन गाकर माहौल को भक्ति रस में डुबो दिया। उनकी मखमली आवाज और भक्ति भाव ने अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिससे गंगा-जमुनी तहजीब की झलक साफ दिखाई दी।
बचपन से गायकी के शौकीन अब्दुल कलाम ने भजन, गजल, कव्वाली और भोजपुरी गीतों को अपनी जिंदगी का आधार बनाया। उन्होंने 2009 से 2017 तक रेडियो स्टेशन पर भोजपुरी गीतों की प्रस्तुति देकर अपनी कला का लोहा मनवाया। उनकी मंडली, जिसमें सूर्यभान (तबला), मेंहदी हसन (ढोलक), सफीउल्लाह (बैंजो), सदरे आलम (नाल) और शिवम श्रीवास्तव (पैड) शामिल हैं, ने यूपी, मुंबई, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में अपनी गायकी का जादू बिखेरा है।
अब्दुल कलाम बताते हैं, “संगत ने मुझे भजन की गायकी में रमा दिया। यह मेरी खेती है, जिससे मेरे परिवार का भरण-पोषण होता है।” उनके परिवार में पत्नी, छह बेटे और एक बेटी हैं, और गायकी ही उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है। छोटे से घर में रहने वाले इस कलाकार का हुनर बड़ा है, जो हर मंच पर दर्शकों के दिल जीत लेता है।
शनिवार को पुलिस लाइन में जन्माष्टमी के अवसर पर उनकी प्रस्तुति ने सभी को भावविभोर कर दिया। उनकी गायकी न केवल कला का प्रदर्शन थी, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल भी बनी। अब्दुल कलाम का यह सफर संतकबीरनगर के लिए गर्व का विषय है, जो सांस्कृतिक समन्वय और भक्ति के रंगों को जीवंत करता है।















