एम्स गोरखपुर में सीएसआर पर अध्ययन, तनाव से 40 मरीजों की आंखों की रोशनी प्रभावित।
गोरखपुर। तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ता मानसिक तनाव आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा रहा है। एम्स गोरखपुर के नेत्र रोग विभाग में सेंट्रल सिरस रेटिनोपैथी (सीएसआर) पर अध्ययन चल रहा है, जिसमें तनाव के कारण आंखों पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच की जा रही है। अध्ययन में 40 मरीजों में सीएसआर के लक्षण पाए गए, जो ज्यादातर अत्यधिक तनाव, घबराहट, और नींद की कमी से जूझ रहे थे। यह बीमारी खासकर युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के पुरुषों में बढ़ रही है।
नेत्र रोग विभाग की प्रभारी डॉ. अलका त्रिपाठी के निर्देशन में डॉ. शगुन गौर इस अध्ययन को अंजाम दे रही हैं। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि सीएसआर में रेटिना की परतों के बीच तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है, सीधी रेखाएं टेढ़ी दिखती हैं, और आंखों के सामने धब्बे या धुंध छा जाती है। इसका प्रमुख कारण तनाव, नींद की कमी, और स्टेरॉयड दवाओं का अनियंत्रित उपयोग है।
अध्ययन के दौरान ओपीडी में आने वाले मरीजों से उनकी मानसिक स्थिति, तनाव, अवसाद, और दिनचर्या की जानकारी ली गई। डॉ. गौर ने बताया कि लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो रेटिना की रक्त वाहिनियों को प्रभावित करता है। इससे तरल पदार्थ जमा होकर दृष्टि पर दबाव डालता है, जो स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकता है।
सीएसआर के लक्षण:
– एक आंख से धुंधला दिखना
– सीधी रेखाएं टेढ़ी नजर आना
– आंखों के सामने धब्बे या धुंध
– रंगों की स्पष्टता में कमी
बचाव के उपाय:
– नियमित ध्यान, योग, और व्यायाम से तनाव कम करें
– 7-8 घंटे की नींद लें
– बिना डॉक्टरी सलाह के स्टेरॉयड न लें
– नियमित नेत्र जांच कराएं
एम्स की यह पहल तनाव और आंखों की सेहत के बीच संबंध को उजागर करती है, जो आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित करती है।















