स्वच्छ भारत मिशन: गोरखपुर में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की नई शुरुआत।
गोरखपुर। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत सरदारनगर के चौरी ग्राम पंचायत में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट का प्रशिक्षण और संचालन शुरू हो गया है। जिला पंचायत राज अधिकारी निलेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में यह पहल पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देगी।
प्रशिक्षण और यूनिट संचालन
पंचायती राज निदेशक के निर्देश पर सरदारनगर, पिपरौली और पिपराइच विकास खंडों के अधिकारियों ने चौरी में स्थापित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट का दौरा किया। इस दौरान सहायक विकास अधिकारी बच्चा सिंह, ऋषिकेश सिंह, अभिजीत सिंह, अवनींद्र तिवारी, राधेश्याम जयसवाल, अरविंद सिंह, ग्राम पंचायत अधिकारी आदित्य मिश्रा, ग्राम विकास अधिकारी गोविंद कुमार, मनीष सिंह, जिला कंसल्टेंट्स, खंड प्रेरक और सफाई कर्मचारियों की मौजूदगी में प्रशिक्षण आयोजित हुआ।
विशेषज्ञ प्रशिक्षण और सेग्रीगेशन
वाराणसी की रीसाइक्लो पावर एलएलपी के श्री सूर्य प्रकाश सिंह ने सात प्रकार के प्लास्टिक—एलएमपी, एलडीपी, एचएमपी, पीपी पन्नी, मिल्क पाउच, मेडिकल पन्नी, एसयूपी, और पानी की बोतल—के अलग-अलग सेग्रीगेशन की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने प्लास्टिक को सुव्यवस्थित ढंग से रखने और रिसाइक्लिंग के लिए तैयार करने की तकनीकों पर जोर दिया। प्रशिक्षण के बाद यूनिट पर प्लास्टिक सेग्रीगेशन का कार्य नियमित रूप से शुरू कर दिया गया।
कचरा प्रबंधन की नई व्यवस्था
पंचायत राज विभाग द्वारा स्थापित इन यूनिटों पर अब ग्राम पंचायतों से एकत्रित प्लास्टिक को सफाई कर्मचारी रिसोर्स रिकवरी सेंटर तक पहुंचाएंगे। यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यूनिटें न केवल कचरे को कम करेंगी, बल्कि रिसाइक्लिंग के जरिए संसाधनों का पुनर्चक्रण भी सुनिश्चित करेंगी।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
निलेश प्रताप सिंह ने बताया कि यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ग्राम पंचायत स्तर पर प्लास्टिक कचरे का संगठित प्रबंधन न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देगा, बल्कि ग्रामीणों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी पैदा करेगा। उन्होंने सफाई कर्मचारियों और अधिकारियों से नियमित निगरानी और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
स्थानीय स्तर पर उत्साह
इस पहल से स्थानीय समुदाय में उत्साह है। ग्रामीणों का मानना है कि प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट गांवों को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने में मदद करेगी। प्रशिक्षण में शामिल कर्मचारियों ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक शुरुआत बताया।















