गेहूं खरीद में लापरवाही, डीएम ने रोका क्रय केंद्र प्रभारियों का वेतन
संतकबीरनगर। जनपद में गेहूं खरीद में धीमी प्रगति और कार्य में शिथिलता को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी आलोक कुमार ने कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने खाद्य विभाग के सभी क्रय केंद्र प्रभारियों, जिला प्रबंधक पीसीएफ, सहायक आयुक्त व सहायक निबंधक (सहकारिता) के मई 2025 के वेतन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। यह निर्णय गेहूं खरीद के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में अत्यधिक कम प्रगति के कारण लिया गया।
शासन ने रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिए संतकबीरनगर में 24,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया। जनपद में कुल 48 क्रय केंद्र सक्रिय हैं, जिनमें खाद्य विभाग के 22, पीसीएफ के 22, मंडी समिति का 1 और भारतीय खाद्य निगम (भाखानि) के 3 केंद्र शामिल हैं। हालांकि, 9 मई 2025 तक मात्र 2851.20 मीट्रिक टन (11.88%) गेहूं की खरीद हो सकी है, जो लक्ष्य से काफी कम है।
विभागवार प्रगति की समीक्षा में स्थिति और चिंताजनक पाई गई। खाद्य विभाग को 11,000 मीट्रिक टन के लक्ष्य के सापेक्ष केवल 2161.00 मीट्रिक टन (19.65%), पीसीएफ को 11,000 मीट्रिक टन के सापेक्ष 470.30 मीट्रिक टन (4.28%), मंडी समिति को 500 मीट्रिक टन के सापेक्ष 176.05 मीट्रिक टन (35.21%) और भाखानि को 1500 मीट्रिक टन के सापेक्ष मात्र 43.90 मीट्रिक टन (2.93%) गेहूं की खरीद हुई। इस सुस्त प्रदर्शन ने शासन के लक्ष्यों को पूरा करने में जनपद को पीछे छोड़ दिया।
जिलाधिकारी ने समीक्षा बैठक में क्रय केंद्र प्रभारियों और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि गेहूं खरीद में तेजी लाने और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ सुनिश्चित करने के लिए कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वेतन रोकने का यह कदम अधिकारियों को जवाबदेह बनाने और खरीद प्रक्रिया में सुधार लाने के लिए उठाया गया है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्रय केंद्रों पर किसानों को किसी भी तरह की असुविधा न हो और खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी व त्वरित बनाया जाए। साथ ही, उन्होंने शासन के लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सभी विभागों को समन्वित प्रयास करने को कहा। इस कदम से न केवल गेहूं खरीद में तेजी आने की उम्मीद है, बल्कि किसानों को भी उनका हक समय पर मिल सकेगा। स्थानीय किसानों ने इस निर्णय का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे खरीद प्रक्रिया में सुधार होगा।















