योगी सरकार की सस्ती बिजली पहल: यूपी को 2958 करोड़ की बचत
लखनऊ,
योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 1600 मेगावाट की तापीय परियोजना से 1500 मेगावॉट बिजली 25 वर्षों तक सस्ती दरों पर खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। डीबीएफओओ मॉडल के तहत निजी कंपनी के साथ 5.38 रुपये प्रति यूनिट की न्यूनतम टैरिफ दर पर समझौता किया गया, जिससे यूपी पावर कॉर्पोरेशन को 25 वर्षों में 2958 करोड़ रुपये की बचत होगी।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि बिडिंग प्रक्रिया में सात कंपनियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से सबसे कम 5.38 रुपये प्रति यूनिट (3.727 रुपये फिक्स्ड चार्ज और 1.656 रुपये फ्यूल चार्ज) की पेशकश करने वाली कंपनी को चुना गया। यह दर मौजूदा तापीय परियोजनाओं जैसे जवाहरपुर, ओबरा, घाटमपुर (6.6-9 रुपये/यूनिट) की तुलना में कहीं सस्ती है। 2030-31 में प्लांट कमीशन होने पर भी बिजली 6.10 रुपये प्रति यूनिट की दर से मिलेगी, जो सार्वजनिक और अन्य निजी संयंत्रों से सस्ती होगी।
यह परियोजना 2030-31 में शुरू होगी और बेस लोड ऊर्जा की जरूरत पूरी करेगी। इससे उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को स्थिर, किफायती बिजली मिलेगी। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, 2033-34 तक उत्तर प्रदेश को 10,795 मेगावॉट अतिरिक्त तापीय ऊर्जा की जरूरत होगी। इस मांग को पूरा करने के लिए डीबीएफओओ मॉडल के तहत यह कदम उठाया गया, जिसमें निजी कंपनी परियोजना का निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन करेगी, जबकि सरकार कोयला लिंकेज और बिजली खरीद सुनिश्चित करेगी।
यह डील महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों और पिछले पावर परचेज एग्रीमेंट्स की तुलना में भी सस्ती है। जुलाई 2024 में शुरू हुई बिडिंग प्रक्रिया में पांच कंपनियों ने फाइनेंशियल बिड में हिस्सा लिया, और न्यूनतम टैरिफ वाली कंपनी के साथ 25 वर्षों का पावर सप्लाई एग्रीमेंट हस्ताक्षरित होगा।
यह पहल न केवल ऊर्जा संकट से निपटने की ठोस रणनीति दर्शाती है, बल्कि प्रदेश को सस्ती और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति के माध्यम से औद्योगिक और आर्थिक विकास की राह पर आगे बढ़ाएगी। योगी सरकार का यह निर्णय उत्तर प्रदेश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला एक दूरदर्शी कदम है।















