बाबा साहेब की 134वीं जयंती: गोरखपुर में माल्यार्पण और पद यात्रा के साथ गूंजा समानता का संदेश।

बाबा साहेब की 134वीं जयंती: गोरखपुर में माल्यार्पण और पद यात्रा के साथ गूंजा समानता का संदेश।

गोरखपुर 

गोरखपुर में संविधान निर्माता, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 134वीं जयंती पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। मंडलायुक्त सभागार, जिला अधिकारी सभागार और तहसील सदर में बाबा साहेब के चित्र पर माल्यार्पण कर अधिकारियों और नागरिकों ने उनके मानवतावादी आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया। यह अवसर न केवल बाबा साहेब के योगदान को याद करने का था, बल्कि उनके विचारों को समाज के हर कोने तक पहुंचाने का भी।

शहर और गांवों में अंबेडकरवादियों ने विशाल पद यात्राएं निकालीं, जिनमें “बाबा साहेब अमर रहे!”, “जब तक सूरज चाँद रहेगा, बाबा साहेब का नाम रहेगा!” और “संविधान निर्माता अमर रहे!” जैसे गगनभेदी नारे गूंजे। ये नारे बाबा साहेब की विरासत को जीवंत करने के साथ-साथ सामाजिक समानता और जागरूकता का संदेश भी फैलाते रहे। पद यात्राओं ने गोरखपुर की सड़कों को एकता और संकल्प के रंग में रंग दिया, जहां लोग बाबा साहेब के शिक्षा, संगठन और संघर्ष के मंत्र को दोहराते नजर आए।

बाबा साहेब की विचारधारा, जो शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित है, आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। उनके द्वारा रचित संविधान ने देश को एकता और प्रगति का मार्ग दिखाया। इस जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों ने उनके इस योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया। सभागारों में माल्यार्पण और गलियों में गूंजते नारों ने एक स्वर में यही कहा कि बाबा साहेब का सपना एक समरस और शिक्षित समाज हम सबकी जिम्मेदारी है।

यह आयोजन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का आह्वान था। गोरखपुर में बाबा साहेब की जयंती ने उनके विचारों को जीवंत रखने और समाज में समता लाने का संदेश दिया। यह दिन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा बना, जो उनके दिखाए रास्ते पर चलकर देश को आगे ले जाना चाहता है।

 

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