दिल दहलाने वाला हत्याकांड: रंजिश की आग में जलमग्न हुई एक जिंदगी, हत्यारे हथियार समेत गिरफ्तार।
संतकबीरनगर में सनसनीखेज खुलासा: ई-रिक्शा चालक की हत्या का राज खुला
संतकबीरनगर
संतकबीरनगर जिले में एक ऐसी घटना ने सभी को झकझोर दिया, जहां पुरानी रंजिश ने एक बेकसूर की जान ले ली। कोतवाली खलीलाबाद पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने इस जघन्य हत्याकांड का पर्दाफाश कर दो अभियुक्तों—रवि प्रकाश उर्फ रोहित और हरिकेश सिंह—को हत्या में प्रयुक्त लोहे के पाइप, मोटरसाइकिल, तीन मोबाइल और 350 रुपये नकद के साथ धर दबोचा। इस बड़ी सफलता पर पुलिस अधीक्षक सत्यजीत गुप्ता ने जांच टीम को 25,000 रुपये के नकद पुरस्कार से नवाजने की घोषणा की।
क्या थी घटना?
10 फरवरी 2025 की रात, बैरमपुर निवासी अमन, जो ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था, अचानक लापता हो गया। उसके पिता हरिश्चंद्र ने बताया कि उस दिन अमन अपनी मां को खलीलाबाद कचहरी से घर छोड़ने गया था। इसके बाद वह रात को घर नहीं लौटा। अगले दिन, 11 फरवरी को उसका ई-रिक्शा घोरही गांव के पास लावारिस हालत में मिला। हरिश्चंद्र को शक था कि उनके परिवार के जमीनी विवाद से जुड़े कुछ लोग—ओम प्रकाश, जय प्रकाश, श्याम और रवि उर्फ रोहित—इसमें शामिल हो सकते हैं। इस शिकायत पर कोतवाली खलीलाबाद में मुकदमा (क्राइम नंबर 137/2025, धारा 140(3) बीएनएस) दर्ज हुआ।
लगभग डेढ़ महीने बाद, 23 मार्च 2025 को महुली थाना क्षेत्र के मैन्सिर गांव में नहर के किनारे एक सड़ा-गला शव मिला। शव के कपड़ों से हरिश्चंद्र ने अपने बेटे अमन की पहचान की। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मुकदमे में हत्या और अन्य गंभीर धाराएं (103(1), 3(5), 238, 315, 317(2) बीएनएस) जोड़ीं और जांच को तेज कर दिया।
पुलिस की चाक-चौबंद कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक सत्यजीत गुप्ता के कुशल निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद अजीत चौहान की निगरानी में कोतवाली खलीलाबाद के प्रभारी निरीक्षक पंकज कुमार पाण्डेय और एसओजी प्रभारी सर्वेश राय ने अपनी टीम के साथ मिलकर इस रहस्य को सुलझाने का बीड़ा उठाया। महीनों की मेहनत और सुरागों की बारीकी से छानबीन के बाद, 13 अप्रैल 2025 को पुलिस ने भुवरिया-पायलपार रोड के धमैचा मोड़ पर रवि प्रकाश उर्फ रोहित (बैरमपुर) और हरिकेश सिंह (कटाई) को गिरफ्तार कर लिया।
हत्यारों का खौफनाक कबूलनामा
पूछताछ में रवि प्रकाश ने हत्या की पूरी कहानी उगल दी। उसने बताया कि हरिश्चंद्र के परिवार से जमीनी विवाद के चलते पिछले साल उसकी मां और भाई के साथ मारपीट हुई थी। इस अपमान का बदला लेने के लिए उसने अमन को निशाना बनाया। रवि और उसका साथी हरिकेश, जो दोनों ई-रिक्शा चालक हैं, अमन की हर गतिविधि पर नजर रख रहे थे। 10 फरवरी की शाम, जब अमन खलीलाबाद में अकेला था, दोनों ने उसका पीछा शुरू किया। रवि ने गमछे से मुंह ढककर अमन के ई-रिक्शा में सवारी बनकर सवार हो गया और उसे सुनसान जगह पर ले गया। वहां हरिकेश भी पहुंच गया। दोनों ने लोहे के पाइप से अमन के सिर पर कई वार किए, जिससे उसकी तुरंत मौत हो गई।
हत्यारे यहीं नहीं रुके। उन्होंने अमन के शव को प्लास्टिक के बोरे में बंद किया, नहर के किनारे पड़ी ईंटों के साथ बांधा और मैन्सिर नहर में फेंक दिया। अमन का ई-रिक्शा एक खाली मकान के पास छोड़कर दोनों फरार हो गए।
पुलिस ने क्या बरामद किया?
लोहे का चौकोर पाइप (हत्या में प्रयुक्त)
मोटरसाइकिल
तीन मोबाइल फोन
350 रुपये नकद
पुलिस की तारीफ, पुरस्कार की घोषणा
पुलिस अधीक्षक सत्यजीत गुप्ता ने इस जटिल और संवेदनशील मामले को सुलझाने के लिए कोतवाली खलीलाबाद और एसओजी टीम की जमकर सराहना की। उन्होंने जांच में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के हौसले को बढ़ाने के लिए 25,000 रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की।















