आंखन देखी अयोध्या… रामजन्मभूमि से लाइव
मां वेटिलेटर पर है, बेटी उन्हें वीडियो कॉल पर रामलला के दर्शन करवाने आई है
रामलला विराजमान को देखकर घनघोर इमोशनल हो जाना लाजमी है, हाथ खुद ब खुद जुड़ जाते हैं, होठों पर रामधुन होती है और बिना कहे, बिना बुलाए राम आखों में आंसू बनकर उतर जाते हैं
अयोध्या
कौसल्या जब बोलन जाई। ठुमुकु ठुमुकु प्रभु चलहिं पराई॥
निगम नेति सिव अंत न पावा। ताहि धरै जननी हठि धावा॥
यानी… माता कौशल्या जब बुलाती हैं तो प्रभु ठुमक-ठुमक भाग चलते हैं। वेद और शिव ने भी जिनका अंत नहीं पाया है माता उन्हें हठ से पकड़ने दौड़ती हैं।
चारों पहर रामजन्मभूमि पथ को जानेवाला रास्ता छैना हथौड़ी लिए मेहनतकशों से पटा हुआ है। कट-कट, धाएं धपड़ आवाजें हैं। धूल से सने हाथ-पांव-चेहरे। और सबकुछ जल्दी-जल्दी पूरा कर देने की धुन है। किसी अद्भुत उत्सव की तैयारी का फुल थ्रोटल जोश है ये। पत्थरों को तराशते न जाने कितने हाथ हैं जिन्हें 21 जनवरी के पहले रामजन्मभूमि पथ को तैयार करने का जिम्मा मिला है। ये सब उत्तरप्रदेश पुलिस की सुरक्षा के हवाले है। वहीं कुछ दूरी पर एनएसजी कमांडो हर चप्पे को कागज पर नोट कर रहे हैं। हर दरीचा, हर मुहाने और कदमों की छाप पर अब उनकी नजर है।
आखिरी बैरिकेडिंग के ठीक पहले कुछ लोग इंतजार कर रहे हैं भोग आरती में जाने का। हाथ में विशेष पास हैं। चारों भाईयों के साथ टेंट में विराजे रामलला विराजमान को बस देखने के लिए कदम रोके खड़े हैं। जैसे ही सिक्योरिटी चेक होता है वो दौड़ पड़ते हैं।
इन दौड़ पड़े कदमों में वो बेटी भी शामिल है जो दिल्ली से लगातार दूसरे दिन यहां दर्शन को आई है। उनकी 75 वर्षीय मां मुन्नीबाई मैक्स अस्पताल में भर्ती हैं। वेंटिलेटर पर हैं। मां को रामलला के दर्शन करवाना था इसलिए कल भी दर्शन को आई थीं। कल जब तक भीतर पहुंची मां बेहोश हो गई थी, दर्शन नहीं कर पाईं। इसलिए आज जब मां को होश आया तो दोबारा दौड़ी आई। फोन भीतर ले जाने की इजाजत नहीं है। इसलिए वहां मौजूद सिक्योरिटी वालों से कहा मां को वीडियो कॉल से दर्शन करा दें।
ये भोग आरती के खास दर्शन हैं। दिन में बमुश्किल 30-35 लोगों को इसमें आने मिलता है। और जो पहली बार यहां पहुंचता है उसका इमोशनल हो जाना लाजमी है। पर्दा खुलता है और हाथ खुद ब खुद जुड़ जाते हैं, होठों पर रामधुन होती है और बिना कहे, बिना बुलाए राम आखों में आंसू बनकर उतर जाते हैं।
ये सबके जीवन में बसे राम की एक कहानी भर है। लेकिन अयोध्या जी ऐसी तमाम कहानियों से बोरमबोर है। 2019 में रामजन्मभूमि का फैसला आने से पहले बमुश्किल 3000 लोग यहां दर्शन के लिए आते थे। आजकल रामलला विराजमान के दर्शन को हर दिन 25-30 हजार लोग आ रहे हैं। और उनके अलावा देश भर में ऐसे कई लोग हैं जिनके हिस्से रामलला विराजमान के दर्शन तो नहीं आते लेकिन उनके हिस्से के अपने-अपने राम हैं।















