–पंडित सूर्य नारायण चतुर्वेदी की स्मृति में श्रीमद्भागवत कथा का हुआ शुभारंभ।
-भिटहॉ स्थित चतुर्वेदी आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथा व्यास पंडित ज्ञान चंद्र द्विवेदी ने सुनाई शुकद्देव जी की कथा,बताया पुत्र धर्म।
-संत कबीर नगर उत्तर प्रदेश -स्वर्गीय पंडित सूर्य नारायण चतुर्वेदी की स्मृति में भिटहॉ स्थित चतुर्वेदी आवास पर शुक्रवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।अनवरत नौ दिनो तक चलने वाले कार्यक्रम में कथा वाचक पंडित ज्ञान चंद्र द्विवेदी भगवत कथा का रसपान कराएंगे।
बतौर मुख्य यजमान माता श्रीमती चंद्रावती देवी की अगुआई में समाजसेवी डा0उदय प्रताप चतुर्वेदी ने कथा का आयोजन किया।पूजा,अनुष्ठान और गणेश वंदना,हनुमान चालिसा से शुरु हुए श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथा वाचक पंडित ज्ञान चंद्र द्विवेदी ने शुकद्देव जी की कथा सुनाई।उन्होंने बताया कि शुकद्देव जी ने बारह वर्ष मॉ के गर्भ में बिता दिए।पिता के बार-बार आग्रह के बाद शुकद्देव जी ने कहा कि जब श्रीहरि विष्णु मुझे आश्वस्त करेंगे कि हम पर माया का विकार व्याप्त नहीं होगा तबतक हम गर्भ से बाहर नहीं आएंगे।अंतत:भगवान विष्णु ने शुकद्देव जी को इस बात भरोसा दिया कि तुम पर माया का प्रभाव नहीं पड़ेगा।तब वे गर्भ से बाहर आए।गर्भ से बाहर होते ही वे वैराग्य धारण कर लिए और जंगल की ओर चल दिए।पिता व्यास ऋषि के बुलाने पर भी वे पीछे मुड़कर नहीं देखे।क्योंकि वे माया के विकार से परे थे।कथा वाचक ने प्रभु की महिमा का बखान करते हुए सत्कर्म पर चलने की सीख दी।साथ ही पुत्र धर्म क्या होना चाहिए इस पर गहराई से प्रकाश डाला।कथा की शुरुआत में माता चंद्रावती देवी के साथ सूर्या संस्थान के चेयरमैन डा0उदय प्रताप चतुर्वेदी बड़े भाई एबीआरएल के एमडी जनार्दन चतुर्वेदी, अनुज पूर्व प्रमुख राकेश चतुर्वेदी,जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव,अभयनंद सिंह ने व्यास गद्दी पर विराजमान कथा वाचक को तिलक लगाकर व्यास गद्दी की आरती की और दान दक्षिणा दी।शुबह से चल रहे पूजा अनुष्ठान के समापन के बाद कथा का शुभारंभ हुआ।















