साइबर ठगी पर शिकंजे के लिए पुलिस और बैंक प्रबंधकों ने बनाई रणनीति डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और म्यूल खातों पर विशेष निगरानी के निर्देश; 74 शाखा प्रबंधक हुए शामिल

साइबर ठगी पर शिकंजे के लिए पुलिस और बैंक प्रबंधकों ने बनाई रणनीति

डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और म्यूल खातों पर विशेष निगरानी के निर्देश; 74 शाखा प्रबंधक हुए शामिल

गोरखपुर। बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और ठगी की घटनाओं में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार को पुलिस लाइन स्थित व्हाइट हाउस सभागार में साइबर क्राइम सेल एवं अपराध शाखा की ओर से बैंक शाखा प्रबंधकों के साथ महत्वपूर्ण गोष्ठी आयोजित की गई। पुलिस अधीक्षक अपराध के नेतृत्व में हुई बैठक में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, म्यूल खातों के दुरुपयोग और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस-बैंक समन्वय को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं। वहीं निवेश में अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों से रकम संदिग्ध खातों में ट्रांसफर कराई जा रही है। ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए बैंक और पुलिस के बीच त्वरित सूचना आदान-प्रदान को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया।

म्यूल खातों पर रहेगी विशेष नजर

बैठक में बैंक अधिकारियों को नए खाते खोलते समय निर्धारित मानकों के साथ विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। पुलिस ने कहा कि साइबर अपराधियों द्वारा दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। ऐसे म्यूल खातों की पहचान और संदिग्ध लेनदेन की निगरानी में बैंक स्तर से प्रभावी सहयोग सुनिश्चित किया जाए। खाता खोलने की प्रक्रिया में जियो टैगिंग सहित अन्य आवश्यक पहलुओं पर भी चर्चा हुई।

वरिष्ठ नागरिकों को करें जागरूक

बैंकों में साइबर अपराध से बचाव संबंधी जागरूकता पोस्टर प्रमुख स्थानों पर लगाने के निर्देश दिए गए। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और पेंशन खाताधारकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने को कहा गया। ग्राहकों को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, संदिग्ध लिंक, फर्जी कॉल और ओटीपी के जरिए होने वाली ठगी के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि बैंक कर्मचारी कभी भी फोन पर ओटीपी, एटीएम/डेबिट कार्ड पिन, सीवीवी या इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगते। अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयर करने, रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड करने या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी गई।

ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत

पुलिस अधिकारियों ने बैंक प्रबंधकों से ग्राहकों को साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल cybercrime.gov.in की जानकारी देने को कहा। बताया गया कि साइबर ठगी होने पर पीड़ित को बिना देरी 1930 पर शिकायत करनी चाहिए, ताकि ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई की जा सके।

गोष्ठी में साइबर अपराध से जुड़े मामलों की विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई। बैंक अधिकारियों से पुलिस को आवश्यक बैंकिंग जानकारी उपलब्ध कराने और जांच में तत्परता से सहयोग करने की अपेक्षा की गई।

बैठक में जनपद के विभिन्न बैंकों के 74 शाखा प्रबंधकों तथा थानों के साइबर हेल्प डेस्क के नोडल अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में पुलिस, बैंकिंग संस्थानों और आमजन का समन्वय बेहद जरूरी है। जागरूकता और समय पर सूचना ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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