ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में थमा गोरखपुर का दवा कारोबार ऐतिहासिक बंदी में शामिल हुए हजारों व्यापारी, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में थमा गोरखपुर का दवा कारोबार

ऐतिहासिक बंदी में शामिल हुए हजारों व्यापारी, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

गोरखपुर। ऑनलाइन दवा बिक्री और कॉर्पोरेट फार्मेसी के विरोध में गुरुवार को गोरखपुर का दवा कारोबार पूरी तरह थम गया। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) तथा ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट उत्तर प्रदेश (OCDUP) के आह्वान पर दवा विक्रेता समिति गोरखपुर के नेतृत्व में जिलेभर के दवा व्यापारियों ने ऐतिहासिक बंदी कर अपनी एकजुटता दिखाई। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक थोक और फुटकर दवा की अधिकांश दुकानें बंद रहीं, जिससे बंदी का व्यापक असर देखने को मिला।

भालोटिया मार्केट, बेतियाहाता, मोहद्दीपुर, गोलघर, गोरखनाथ, दाउदपुर और नौशाद सहित शहर के प्रमुख बाजारों में दवा प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे। वहीं बड़हलगंज, गोला, गगहा, खजनी, चौरी-चौरा, कैंपियरगंज, पीपीगंज और बांसगांव जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यापारियों ने बंदी को समर्थन दिया।

बंदी के दौरान हजारों दवा व्यापारी भालोटिया मार्केट में एकत्र हुए और वहां से शांतिपूर्ण जुलूस निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री, फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन, अनियंत्रित होम डिलीवरी और कॉर्पोरेट कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की गई।

समिति के अध्यक्ष योगेन्द्र नाथ दूबे और महामंत्री आलोक चौरसिया ने कहा कि बिना पर्याप्त निगरानी के ऑनलाइन दवा बिक्री जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि भारी छूट देकर बाजार व्यवस्था को प्रभावित किया जा रहा है, जिससे छोटे दवा व्यापारियों के सामने संकट खड़ा हो गया है।

व्यापारियों ने GSR 220(E) और GSR 817(E) जैसी अधिसूचनाओं को निरस्त करने की मांग भी उठाई। हालांकि जनहित को देखते हुए जिला अस्पताल, जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी को खुला रखा गया, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

दवा व्यापारियों के अनुसार इस बंदी से जिले में करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ, लेकिन उन्होंने इसे जनस्वास्थ्य और सुरक्षित दवा व्यवस्था की लड़ाई बताया। “जनस्वास्थ्य बचाओ—दवा व्यापार बचाओ” के नारों के बीच व्यापारियों ने सरकार से जल्द प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

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