गोरखपुर उत्तर प्रदेश ।
आई फ्लू से कैसे बचा जाए
आंख की बाहरी पारदर्शी परत की सूजन / जलन को कंजंक्टिवाइटिस (आई फ्लू) कहते हैं। यह सूजन आंख के सफेद हिस्से को ढकती है। दरअसल, मौसम में नमी और बारिश के कारण वायरस, बैक्टीरिया और कवक जैसे जीवों का बढ़ना आसान हो जाता है। हवा के कारण यह परेशानी अन्य लोगों में फैलती है। कई मामलों में केवल एलर्जी होती है, जिसमें आंख से पानी का स्राव और लालिमा व खुजली होती है। इसके लिए केवल एंटी- एलर्जिक और ठंडी पट्टी की आवश्यकता होती है। वायरल संक्रमण आमतौर पर 1 से 2 सप्ताह में स्वयं खत्म हो जाता है। अगर जीवाणु संक्रमण है और आंख के चारो ओर सूजन है तो आपको एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। प्रसार को रोकने के लिए हाथ की स्वच्छता रखें, सैनिटाइजर का उपयोग करें, संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क से बचें, रूमाल और संक्रमित व्यक्तियों के मोबाइल फोन आदि को सामान्य लोगों से दूर रखें। ज्यादा भीड़-भाड़ वाले वातावरण और संक्रमित व्यक्तियों के साथ निकट संपर्क के कारण वायरस तेजी से फैल सकता है, ऐसे में बचाव के तरीकों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक हो जाता है। इस बीमारी का निदान करने के लिए सबसे पहले डॉक्टर आंखों की जांच करता है। इसके जरिए ये पता लगाया जाता है कि आपको जो लक्षण नजर आ रहे हैं, वह आई फ्लू होने के कारण हैं या फिर आंखों से संबंधित कोई और समस्या है। यदि आप में आई फ्लू के लक्षण दिखे रहे हैं तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से संपर्क करके इलाज कराएं। खुद से ही दवाओं या आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल न करें, इससे जोखिम बढ़ सकता है।
– डॉ. रजत कुमार नेत्र रोग विशेषज्ञ















