आस्था के साथ स्वास्थ्य का सशक्त संदेश: गंगोत्री देवी महाविद्यालय में व्रत बना ‘सुपर न्यूट्रिशन डाइट’
गोरखपुर। चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर जब आस्था का उमंग छाया हुआ है, गंगोत्री देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय ने व्रत को स्वास्थ्य और विज्ञान से जोड़ते हुए एक अनुकरणीय पहल की। गृह विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित “फलाहार, पोषण एवं स्वास्थ्य” कार्यक्रम ने स्पष्ट संदेश दिया कि व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संतुलित पोषण के साथ स्वास्थ्य संवर्धन का वैज्ञानिक अवसर भी है।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रबंध निदेशक आशुतोष मिश्र ने किया। उन्होंने कहा, “संतुलित आहार के बिना व्रत केवल उपवास बनकर रह जाता है। लेकिन जब इसमें पोषण का समावेश होता है, तब वही व्रत शरीर के लिए ऊर्जा, संतुलन और संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार बन जाता है।” उन्होंने इसे आस्था और विज्ञान के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक तरीके से किया गया व्रत शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया को सक्रिय कर ऊर्जा का पुनर्निर्माण करता है।
प्राचार्य डॉ. गौरी पांडेय ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में व्रत के दौरान पोषण की अनदेखी एक बड़ी चुनौती बन गई है। उन्होंने बल दिया, “व्रत को सही पोषण से जोड़ना समय की आवश्यकता है, तभी यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।” उन्होंने छात्राओं एवं शिक्षिकाओं के प्रयासों को समाज के लिए प्रेरणादायक मॉडल बताया।
कार्यक्रम में बी.ए. एवं एम.ए. गृह विज्ञान तथा एमएससी आहार एवं पोषण की छात्राओं ने 20 से अधिक प्रकार के संतुलित एवं पौष्टिक फलाहार तैयार किए। इनमें ड्राई फ्रूट लड्डू, एनर्जी ड्रिंक, संतुलित फल चाट, प्रोटीन युक्त पेय और साबूदाना आधारित हेल्दी व्यंजन प्रमुख रहे। सभी व्यंजन महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर वैज्ञानिक पद्धति से बनाए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित फलाहार व्रत के दौरान पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और मानसिक एकाग्रता में सुधार लाता है। इस आयोजन ने व्रत को “हेल्थ फेस्टिवल” के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया।
गृह विज्ञान विभाग की शिक्षिकाओं डॉ. रेनू गौर, डॉ. कुमुद त्रिपाठी, तृप्ति सिंह, शिवांगी त्रिपाठी एवं प्रिया श्रीवास्तव—की मार्गदर्शक भूमिका रही। विभागाध्यक्ष डॉ. कुमुद त्रिपाठी ने कहा कि यह आयोजन न केवल शैक्षिक गतिविधि था, बल्कि समाज को यह संदेश देने में सफल रहा कि सही जानकारी और संतुलित आहार से व्रत को स्वास्थ्य उत्सव में बदला जा सकता है।















