सरयू नहर में पानी की कमी से सहजनवा के किसान परेशान, पंपिंग सेट पर निर्भरता बढ़ी

सरयू नहर में पानी की कमी से सहजनवा के किसान परेशान, पंपिंग सेट पर निर्भरता बढ़ी

 

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश सरकार ने सरयू नहर परियोजना के तहत 9,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पूर्वांचल के नौ जिलों, जिसमें गोरखपुर भी शामिल है, में 14.04 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए नहरों का जाल बिछाया था। इसका उद्देश्य किसानों की खेती लागत कम कर उनकी आय बढ़ाना और बाढ़ की समस्या से निजात दिलाना था। लेकिन सहजनवा तहसील, गोरखपुर के किसानों के लिए यह परियोजना अपेक्षित लाभ नहीं दे पा रही है। सरयू नहर में पानी की कमी के कारण किसान धान की रोपाई के लिए महंगे पंपिंग सेट का सहारा लेने को मजबूर हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

नहरों में पानी की कमी, किसानों पर आर्थिक बोझ:

लगभग एक दशक पहले बखिरा पंप हाउस को सरयू नहर परियोजना से जोड़ा गया था, ताकि सहजनवा के दर्जनों गांवों में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित हो। लेकिन, धान रोपाई के महत्वपूर्ण समय में नहरें सूखी रहती हैं। किसान अवधेश कुमार वर्मा जैसे लाखों किसानों को नहर के बजाय बोरवेल और पंपिंग सेट पर निर्भर होना पड़ता है, जिससे डीजल, बिजली, और रखरखाव का अतिरिक्त खर्च उनकी लागत बढ़ाता है और लाभ कम करता है। गोरखपुर, बस्ती, और संतकबीरनगर जैसे जिलों में किसानों ने इसी तरह की समस्याएं बताईं, जहां नहरें महीनों से सूखी हैं।

सिंचाई विभाग की लापरवाही:

किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग की उदासीनता के कारण नहरों में पानी की आपूर्ति अनियमित है। सरयू नहर परियोजना, जो 1978 में शुरू हुई और 2021 में पूर्ण हुई, को घाघरा, सरयू, राप्ती, बांगर, और रोहिणी नदियों को जोड़कर 29 लाख किसानों को लाभ पहुंचाने का दावा किया गया था। लेकिन, वर्तमान में पानी की कमी ने इस परियोजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सहजनवा के उपजिलाधिकारी दीपक गुप्ता ने स्वीकार किया कि उन्हें इस समस्या की जानकारी है और सिंचाई विभाग से तत्काल बातचीत कर समाधान का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, किसानों का कहना है कि आश्वासनों के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हो रहा।

प्रशासनिक जवाबदेही और समाधान की जरूरत:

किसानों की मांग है कि सिंचाई विभाग नहरों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करे। सरयू नहर परियोजना के तहत बस्ती और गोंडा में 4.20 और 3.96 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की व्यवस्था है, लेकिन पानी की अनुपलब्धता इस लक्ष्य को प्रभावित कर रही है। इसके अतिरिक्त, जलवायु परिवर्तन और गर्मी के कारण छोटे जल स्रोतों के सूखने से स्थिति और जटिल हो गई ह

 

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