ऑपरेशन त्रिनेत्र: 10,067 सीसीटीवी कैमरों से संतकबीरनगर में अपराध पर लगाम।
संतकबीरनगर
संतकबीरनगर में ऑपरेशन त्रिनेत्र की सफलता: जनसहयोग और सीसीटीवी ने बदली पुलिसिंग की तस्वीर
संतकबीरनगर। अपराध नियंत्रण में तकनीक और जनसहयोग का अनूठा संगम संतकबीरनगर जिले में देखने को मिल रहा है। ऑपरेशन त्रिनेत्र अभियान के तहत जिले में 10,067 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं, जो अपराधियों पर नजर रखने और वारदातों के खुलासे में पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। इन कैमरों ने न केवल पुलिस का विश्वास जीता है, बल्कि जनता में भी सुरक्षा की भावना को मजबूत किया है। कई बड़ी आपराधिक घटनाओं का खुलासा सीसीटीवी फुटेज की मदद से संभव हुआ, जिसने इस अभियान को और प्रभावी बनाया है।
पुलिसिंग का बदलता स्वरूप
बीते दशकों में पुलिसिंग पूरी तरह पारंपरिक तरीकों पर निर्भर थी। दो हजार के दशक तक पुलिस कर्मियों की संख्या सीमित थी, और संसाधन भी नाकाफी थे। उस दौर में सिपाही साइकिल पर राइफल और टॉर्च के साथ गश्त करते थे। बीट पर दो-तीन दिन बिताने के बाद वे थाने लौटते थे। मुखबिरों और गांव के संभ्रांत लोगों से मिलने वाली सूचनाओं पर पुलिस का तंत्र टिका था। अपराधियों के बीच भी पुलिस की घुसपैठ होती थी, जिससे जरूरत पड़ने पर कानूनी शिकंजा कसना आसान हो जाता था। लेकिन जैसे-जैसे संचार क्रांति ने जोर पकड़ा और अपराधी हाईटेक होने लगे, पुलिसिंग का तरीका भी बदलने लगा।
सीसीटीएनएस (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) के आने से पुलिसिंग में डिजिटल क्रांति आई। ऑनलाइन एफआईआर, कंप्यूटराइज्ड केस डायरी और अन्य तकनीकी नवाचारों ने पुलिस के काम को तेज और पारदर्शी बनाया। 2020 के बाद सीसीटीवी कैमरों का चलन तेजी से बढ़ा, और जुलाई 2024 में नए आपराधिक कानूनों के लागू होने से इस दिशा में और प्रगति हुई। आज पुलिस आधुनिक उपकरणों और तकनीक से लैस है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण ऑपरेशन त्रिनेत्र है।
सीसीटीवी से सुलझीं बड़ी वारदातें
ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत लगाए गए सीसीटीवी कैमरों ने कई जटिल आपराधिक मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
खलीलाबाद हत्याकांड (नवंबर 2024): खलीलाबाद के मोहिउद्दीनपुर मोहल्ले की 80 वर्षीय रामराजी देवी की 21 नवंबर 2024 की रात हत्या कर दी गई थी। वह अपने घर से 300 मीटर दूर खेत में झोपड़ी में सो रही थीं। अगले दिन उनका शव चारपाई पर मिला। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई। पीड़ित के बेटे रामचंदर की तहरीर पर 23 नवंबर को अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज का सहारा लिया और हत्यारोपी की पहचान कर उसे पकड़ने में सफलता हासिल की।
महुली ट्रैक्टर चोरी (नवंबर 2024): महुली थाना क्षेत्र के नाथनगर कस्बे से एक ट्रैक्टर-ट्राली चोरी हो गई थी। यह घटना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन सीसीटीवी फुटेज ने मामले को सुलझाने में मदद की। फुटेज के आधार पर पुलिस ने न केवल चोरों की पहचान की, बल्कि बस्ती जिले के दुबौलिया से चोरी हुआ ट्रैक्टर-ट्राली भी बरामद कर लिया। इस खुलासे में गश्ती सिपाहियों की सक्रियता भी सराहनीय रही।
बेलहर लूट (फरवरी 2025): सिद्धार्थनगर जिले के तेतरी बाजार के शास्त्रीनगर निवासी मोबाइल दुकानदार नूर आलम के दो कर्मचारियों से 1 फरवरी 2025 को बेलहर क्षेत्र के निघुरी के पास बदमाशों ने 6.5 लाख रुपये लूट लिए थे। 5 फरवरी को अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। इस मामले में भी सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस को सुराग दिए, जिसके आधार पर मुठभेड़ में दो बदमाश पकड़े गए।
खलीलाबाद अपहरण और हत्या (फरवरी-मार्च 2025): खलीलाबाद के बैरमपुर निवासी ई-रिक्शा चालक अमन, पुत्र हरिश्चंद, 10 फरवरी 2025 को लापता हो गया था। अगले दिन महुली क्षेत्र के घोरही के पास उसका ई-रिक्शा लावारिस हालत में मिला। पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज किया। 16 फरवरी को पीड़ित पिता की तहरीर पर गांव के चार सगे भाइयों पर अपहरण का केस दर्ज हुआ। 23 मार्च को महुली क्षेत्र की नहर में अमन का शव मिला। इस मामले का खुलासा भी सीसीटीवी फुटेज की मदद से हुआ।
ऑपरेशन त्रिनेत्र: आंकड़ों में उपलब्धियां
16 अप्रैल 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, संतकबीरनगर में 2000 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें से 1471 स्थानों पर काम पूरा हो चुका है। कुल 10,067 कैमरे स्थापित किए गए, जिनमें से 7787 कैमरे 10 जुलाई 2023 के बाद लगाए गए। थाना-वार विवरण इस प्रकार है:
खलीलाबाद: 450 स्थानों पर 2371 कैमरे
धनघटा: 350 स्थानों पर 1289 कैमरे
महुली: 240 स्थानों पर 1038 कैमरे
दुधारा: 240 स्थानों पर 1529 कैमरे
मेहदावल: 230 स्थानों पर 1597 कैमरे
बखिरा: 205 स्थानों पर 897 कैमरे
बेलहरकला: 160 स्थानों पर 777 कैमरे
धर्मसिंहवा: 125 स्थानों पर 569 कैमरे

पुलिस अधीक्षक का आह्वान
पुलिस अधीक्षक सत्यजीत गुप्ता ने कहा, “सीसीटीवी कैमरे अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं और वारदातों को रोकने में सहायक हैं। ये कैमरे पहरेदार की तरह काम करते हैं, जिससे पुलिस को अपराध के खुलासे में आसानी होती है। मैं जनता से अपील करता हूं कि वे अपने घरों, कॉलोनियों, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों में सीसीटीवी कैमरे जरूर लगवाएं। इससे अपराध और अपराधियों पर निगरानी और प्रभावी होगी।”
जनसहयोग की भूमिका
ऑपरेशन त्रिनेत्र की सफलता में जनसहयोग की भूमिका अभूतपूर्व रही है। लोग न केवल अपने निजी परिसरों में कैमरे लगा रहे हैं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर भी सहयोग कर रहे हैं। इससे पुलिस को निगरानी का दायरा बढ़ाने में मदद मिली है। कैमरों की मौजूदगी से अपराधी वारदात करने से पहले कई बार सोचने को मजबूर होते हैं।
आने वाली योजनाएं
जिले में अभी 529 स्थान ऐसे हैं, जहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने बाकी हैं। पुलिस प्रशासन इन स्थानों पर जल्द से जल्द कैमरे स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा, नए तकनीकी उन्नयन जैसे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को शामिल करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।















