पौधारोपण अभियान पर संकट: नर्सरियों में पौधे तैयार नहीं, कैसे पूरा होगा लक्ष्य?।

पौधारोपण अभियान पर संकट: नर्सरियों में पौधे तैयार नहीं, कैसे पूरा होगा लक्ष्य?।

 

गोरखपुर सहजनवां। पर्यावरण संरक्षण के लिए हर साल की तरह इस बार भी पौधारोपण अभियान की तैयारियां शुरू हो गई हैं, लेकिन तहसील की वन विभाग नर्सरियों में पौधों की कमी ने चिंता बढ़ा दी है। दो माह बाद शुरू होने वाले इस अभियान के लिए अभी तक पौधे तैयार नहीं हो सके हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर लक्ष्य कैसे पूरा होगा। पौधों की अनुपलब्धता के चलते अभियान के फेल होने का खतरा मंडरा रहा है।
प्रदेश सरकार पर्यावरण को हरा-भरा रखने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण को बढ़ावा देती है। हर साल 5 जून को शुरू होने वाले इस अभियान के लिए वन विभाग अपनी नर्सरियों से स्थानीय स्तर पर पौधे उपलब्ध कराता है। लेकिन इस बार सहजनवां तहसील की नर्सरियों में हालात चिंताजनक हैं। सीहापार, रानीपार, जोगिया, सजनापार और नचनी स्थित नर्सरियों में पौधों के बीज हाल ही में डाले गए हैं, जिसके चलते पौधे अभी तैयार होने की प्रक्रिया में हैं। दो महीने बाद अभियान शुरू होने के बावजूद पौधों की धीमी तैयारी ने स्थिति को जटिल बना दिया है।
वन विभाग को न केवल अपने लिए, बल्कि गांवों, सरकारी विभागों और नगर पंचायतों को भी पौधे उपलब्ध कराने हैं। इस बार विभाग को 88 हेक्टेयर जमीन पर 1,41,120 पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। इसके अलावा सहजनवां के 64, पाली के 63 और पिपरौली के 63 गांवों में पौधारोपण के लिए पौधों की आपूर्ति करनी है। सहजनवां, घघसरा और उनवल नगर पंचायतों को भी पौधे दिए जाने हैं। लेकिन नर्सरियों में पौधों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह लक्ष्य अधर में लटकता दिख रहा है। क्षेत्र में पौधारोपण के लिए 14 स्थानों का चयन किया गया है, मगर पौधों के बिना यह योजना कागजी साबित हो सकती है।
इनसेट: किस नर्सरी में कितने पौधे?
सीहापार नर्सरी: 92,000 पौधे
रानीपार नर्सरी: 1,900 पौधे
जोगिया नर्सरी: 67,000 पौधे
सजनापार नर्सरी: 1,500 पौधे
नचनी नर्सरी: 1,700 पौधे
एसडीओ डॉ. हरेंद्र सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और अभियान शुरू होने तक पौधे तैयार कर लिए जाएंगे। हालांकि, समय की कमी और मौजूदा तैयारी को देखते हुए यह दावा कितना साकार होगा, यह देखने वाली बात होगी। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों में इसको लेकर चर्चा तेज है कि यदि समय रहते व्यवस्था न हुई, तो यह अभियान सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

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