सड़क सुरक्षा के लिए नई पहल: गोरखपुर में पुलिस और परिवहन कर्मियों को एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटा प्रशिक्षण।

सड़क सुरक्षा के लिए नई पहल: गोरखपुर में पुलिस और परिवहन कर्मियों को एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटा प्रशिक्षण।

 

गोरखपुर। जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक, जो दिनांक 25 फरवरी 2025 को संपन्न हुई थी, में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए आज 10 मार्च 2025 को गोरखपुर के राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) सभागार में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पुलिस विभाग, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के कर्मियों को एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस (आई-रैड) और इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (ई-डार) पोर्टल के उपयोग संबंधी आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया। यह कदम सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।
आई-रैड ऐप एक ऐसा मंच है, जिसमें जनपद में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का पूरा विवरण दर्ज किया जाता है। इसमें दुर्घटना का स्थान, मृतकों और घायलों की संख्या, प्राथमिकी (एफआईआर) की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण तथ्य शामिल होते हैं। जिला सड़क सुरक्षा समिति के निर्णय के अनुपालन में पुलिस अधीक्षक (यातायात) गोरखपुर ने जनपद के सभी थानों से उपनिरीक्षक स्तर के प्रतिनिधियों को नामित किया। इसके लिए पुरानी कलेक्ट्रेट इमारत स्थित एनआईसी भवन में 10 मार्च 2025 को प्रशिक्षण का आयोजन तय किया गया था।
इस प्रशिक्षण सत्र में पुलिस अधीक्षक (यातायात) संजय कुमार, संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) संजय कुमार झा, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) नरेंद्र यादव, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता रोनित सिंह, यात्री कर अधिकारी वी.के. आनंद और रमापति, यातायात निरीक्षक मनोज राय सहित जनपद के सभी थानों के उपनिरीक्षक प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिला रोल आउट प्रबंधक (एनआईसी) शिवम यादव ने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में सभी प्रतिभागियों को आई-रैड और ई-डार ऐप के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी।
संजय कुमार ने बताया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करना और उनके कारणों का विश्लेषण कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। उन्होंने कहा कि तकनीक के सहयोग से यातायात प्रबंधन और सुरक्षा में सुधार होगा। प्रतिभागियों को ऐप में डेटा प्रविष्टि, दुर्घटना विश्लेषण और त्वरित रिपोर्टिंग की प्रक्रिया समझाई गई। यह पहल न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगी, बल्कि नागरिकों के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाने में भी मदद करेगी।

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