अनियमितता में तिलजा के प्रधान का वित्तीय एवं प्रशासनिक पॉवर सीज पढ़े पूरा मामल।
– मनरेगा में मजदूरों की बजाय जेसीबी से कार्य करा कर फंसे प्रधान
– खुद के जवाब में भी प्रधान ने जेसीबी से कार्य कराए जाने की पुष्टि की
– परियोजना निदेशक डीआरडीए नामित हुए अंतिम जांच अधिकारी
– बीडीओ को प्रधान के दायित्व के निर्वहन के लिए ग्राम पंचायत सदस्यों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश
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संतकबीरनगर। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने अनियमितता में विकास खंड सेमरियावां के ग्राम पंचायत तिलजा के प्रधान का वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिया। इसके साथ ही प्रकरण की अंतिम जांच के लिए परियोजना निदेशक ,जिला ग्राम्य विकास अभियंत्रण को जांच अधिकारी नामित किया है। बीडीओ को निर्देश दिया है कि प्रधान के दायित्वों के निर्वहन और कर्तव्यों के पालन के लिए ग्राम पंचायत के सदस्यों की सूची डीपीआरओ कार्यलय में उपलब्ध कराएं।
डीपीआरओ राजेश कुमार ने बताया कि उपायुक्त श्रम एवं रोजगार प्रभात द्विवेदी ने 25 जून 2024 को डीएम को जांच आंख्या प्रस्तुत किया।जिसमें कहा कि विकास खंड सेमरियावां के ग्राम पंचायत तिलजा में निर्माणाधीन शिव मंदिर पोखरा संख्या 126 अमृत सरोवर निर्माण कार्य का 25 जून 2024 को निरीक्षण किए। निरीक्षण के समय मौके पर कोई कार्य नहीं चल रहा था,लेकिन कार्य स्थल पर जेसीबी मशीन, ट्रैक्टर एवं लेवलर आदि के जरिए खुदाई किए जाने के स्पष्ट साक्ष्य पाए गए है। इस परियोजना पर श्रमिको से कार्य न करा कर पूर्णत: मशीन के जरिए ही कार्य कराया जाना स्पष्ट है। मनरेगा एमआईएम की रिपोर्ट में उक्त परियोजना पर 25 जून को श्रमिकों को नियोजित नहीं किया गया है, लेकिन 11जून को 75 श्रमिकों, 15 जून को 73 श्रमिकों, 17 जून को 57 श्रमिकों, 18 जून एवं 19 जून को 75 श्रमिको, 20 जून, 21 जून,22 जून एवं 23 जून को 76 श्रमिकों को उपस्थिति एमएमएस ऐप के माध्यम से दर्ज की गई है।
डीएम ने जिला स्तरीय अधिकारी जेबी सिंह अधिशाषी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग,सुरजीत सिंह अवर अभियंता भूमि संरक्षण, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम गठित कर प्रकरण की जांच कराया। जांच टीम ने 29 जून को जांच आंख्या डीएम को प्रेषित की। जिसमें कहा कि जांच में मौके पर तकनीकी सहायक कृष्ण देव पांडेय ने बताया कि उनके जरिए इस कार्य पर कोई भी मापी नहीं की गई है। तकनीकी सहायक द्वारा प्राक्कलन उपलब्ध कराया गया। जिसकी तकनीकी स्वीकृति लागत 23,10,743 रुपये है। जांच में जेसीबी से 3296.40 घनमीटर मिट्टी कार्य कराया जाना पाया गया। जेसीबी के जरिए कराए गए मिट्टी कार्य में मनरेगा में लगे मजदूरों की दैनिक मजदूरी प्राक्लन में दिए गए रेट के अनुसार कुल 5,78,201 रुपये है। जांच से मनरेगा योजना के अंतर्गत 5,78,201 रुपये का कार्य जेसीबी से कराया गया है,जो अनियमितता की श्रेणी में आता है। डीएम ने 11 सितंबर को प्रधान तिलजा को एक पक्ष का अवसर देते हुए कारण बताओं नोटिस जारी किया।
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प्रधान ने जवाब में खुद जेसीबी से कार्य कराया जाना स्वीकार किया
प्रधान ने 26 सितंबर को अपना स्पष्टीकरण डीपीआरओ कार्यालय में उपलब्ध कराया। अपने स्पष्टीकरण में प्रधान मुहम्मद इनामुल्लाह कुरैशी ने स्वीकार किया है कि कंपोजिट विद्यालय तिलजा में चबूतरा एवं प्रांगण में विद्यालय से निकट पोखरा से मिट्टी आवश्यकता हेतु मजदूरों के अवकाश अवधि में जेसीबी मशीन आदि का प्रयोग कर मिट्टी ढुलाई कार्य कराया गया है। उक्त से स्पष्ट है कि जेसीबी मशीन का प्रयोग करना प्रधान ने खुद स्वीकार किया है। विद्यालय के प्रांगण मे मजदूरों के जरिए ही मिट्टी ढुलाई कराई जा सकती थी,क्यो कि पोखरा विद्यालय के सन्निकट है। मनरेगा योजना में स्वीकृत श्रम परक कार्य में मशीन से कार्य वर्जित है। सत्यापन में समस्त कार्य मशीन से ही कराया जाना पाया गया है। इस वजह से प्रधान का जवाब बलहीन है,जो स्वीकार योग्य नहीं है।
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मनरेगा में जेसीबी से कार्य कराया जाना अनियमितता की श्रेणी में आता है। जांच और सत्यापन में तिलजा में जेसीबी से कार्य कराए जाने की पुष्टि हुई। जिसकी वजह से प्रधान मुहम्मद इनामुल्लाह कुरैशी का वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार पर रोक लगा दिया गया। प्रकरण की अंतिम जांच के लिए परियोजना निदेशक ,जिला ग्राम्य विकास अभियंत्रण को जांच अधिकारी नामित किया गया। बीडीओ को निर्देशित किया गया कि प्रधान के दायित्वों के निर्वहन और कर्तव्यों के पालन के लिए ग्राम पंचायत के सदस्यों की सूची डीपीआरओ कार्यलय में उपलब्ध कराएं।
— महेंद्र सिंह तंवर,
डीएम संतकबीरनगर















