शरीर के जकड़न व दर्द के लिए, कारगर साबित हो रहा फिजियोथेरेपी, ऑपरेशन की झंझट से पाए छुटकारा।
संतकबीरनगर। जीवनशैली में बदलाव के साथ ही लोग शरीर के दर्द से परेशान हैं। मरीज तभी फिजियोथेरेपिस्ट के पास जाते हैं, जब दर्द असहनीय हो जाता है। फिजियोथेरेपी कमजोर पड़ते मसल्स और नसों को मजबूत करता है। जिला अस्पताल में मांसपेशियों के अलावा नसों के दर्द को भी दूर करने के लिए लोग फिजियोथेरेपी का सहारा ले रहे हैं। रोजाना 30 से 35 मरीज इससे इलाज करा रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे हैं जो सैरिबल पैल्सी, मेंटर रिटार्डेशन की बीमारी से पीड़ित होकर पहुंच रहे है।
जिला अस्पताल में फिजियोथेरेपी विभाग की ओपीडी चलती है। हड्डियों की टूट-फूट होने पर शुरूआत में मरीज दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। चूंकि ज्यादा दवाएं खाना सेहत के लिए हानिकारक होता है। ऐसे में मांसपेशियों और जोड़ों से संबंधी दिक्कतों को दूर करने के लिए कई मरीजों को बाद में फिजियोथैरेपी करानी पड़ती है।
जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. बलवंत त्रिपाठी ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान की ऐसी शाखा है, जिसके जरिए शरीर के बाहरी हिस्सों का इलाज किया जाता है। इसमें दवाओं का इस्तेमाल न के बराबर होता है। सिर्फ विभिन्न फिजियो तकनीकी और एक्सरसाइज का उपयोग करके रोगों का इलाज होता है। बताया कि प्रतिदिन 30 से 35 मरीज फिजियोथैरेपी के लिए आते हैं, इनमे पांच से सात बच्चे होते हैं। बच्चों में सेरिबल पैल्सी और मेंटल रिटार्डेशन की शिकायत होती है। यह बच्चों में जन्मजात होता है। इसे फिजियोथेरेपी के जरिए सही किया जाता है। इसमें समय लगता है लेकिन इसका लाभ होता है।इन बीमारी के पहुंचते हैं मरीज
कमर, गर्दन, घुटना, एड़ी, कोहनी, लकवा, सीपी और मेंटल रिटार्डेशन संबंधी मरीजाें का इलाज होता है।
निजी अस्पताल में 250 से 300 रुपये लगता है शुल्क
निजी अस्पताल में फिजियोथैरेपी कराने पर 250 से 300 रुपये प्रतिदिन शुल्क लगता है। साथ ही एक घंटे तक फिजियोथेरेपी करते हैं लेकिन जिला अस्पताल में यह निशुल्क है।
फिजियोथैरेपी की कई प्रकार की मशीनें आई
जिला अस्पताल में फिजियोथैरेपी की कई प्रकार की मशीनें आई हैं, जिनमें शॉर्ट वेव डाईथर्मी, इंटर फरेनशियल, अल्ट्रासोनिक, मसल स्टीमुलेटर, टैक्सन मशीन, फिंगल एक्साइजर, क्वाड्रीसेप टेबल, रोविंग मशीन, हील एक्सरसाइज, ट्रेडमिल आदि शामिल हैं।















