गोवंश संरक्षण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, व्यवस्थाएं दुरुस्त रखें : डीएम
गो-आश्रय स्थलों में हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था के निर्देश, निर्माणाधीन केंद्रों को जल्द पूरा कराने पर जोर
रायबरेली। जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद स्तरीय गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन मूल्यांकन समिति की बैठक हुई। इसमें जिले के अस्थायी व स्थायी गो-आश्रय स्थलों, वृहद गो-संरक्षण केंद्रों और कान्हा उपवनों में संरक्षित निराश्रित गोवंशों के भरण-पोषण समेत विभिन्न व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने गोवंशों के लिए पर्याप्त हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गो-आश्रय स्थलों से संबद्ध टैग्ड भूमि पर हरे चारे का उत्पादन कराने के साथ किसानों से भी हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए अनुबंध करने को कहा। गोशालाओं में मूलभूत सुविधाओं और अवस्थापना संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया।
निर्माणाधीन केंद्रों में तेजी लाने के निर्देश
वृहद गो-संरक्षण केंद्रों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को निर्माण कार्य में तेजी लाकर उन्हें शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने गोशालाओं से जुड़ी चारागाह भूमि को कब्जामुक्त कराने और उसका उपयोग गोवंशों के लिए चारे की व्यवस्था में करने को कहा।
राजमार्गों से गोवंशों को हटाकर गोशालाओं में पहुंचाएं
जिलाधिकारी ने राजमार्गों और आसपास के क्षेत्रों में घूम रहे निराश्रित एवं बेसहारा गोवंशों को अभियान चलाकर गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित कराने के निर्देश दिए। शासन द्वारा विभिन्न संस्थाओं को आवंटित गोशालाओं के प्रबंधन और संचालन की भी समीक्षा की गई। संबंधित अधिकारियों को गोशालाओं की व्यवस्थाएं लगातार दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए।
टीकाकरण अभियान और नन्द बाबा दुग्ध मिशन की समीक्षा
बैठक में एफएमडी और एलएसडी टीकाकरण अभियान की भी समीक्षा हुई। जिलाधिकारी ने शेष गोवंशों का समयबद्ध टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं नन्द बाबा दुग्ध मिशन के तहत नन्दिनी और मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को अनुदान उपलब्ध कराने संबंधी पत्रावलियां शीघ्र अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजने को कहा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अंजुलता, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सिद्धार्थ, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार प्रमोद सिंह, परियोजना निदेशक डीआरडीए मुनेश चंद्र, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. कुलदीप द्विवेदी समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।















