थानाध्यक्ष की मौत में हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का खुलासा, महिला समेत तीन गिरफ्तार

थानाध्यक्ष की मौत में हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का खुलासा, महिला समेत तीन गिरफ्तार

बस्ती। वाल्टरगंज के थानाध्यक्ष रहे स्व. सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग से जुड़े कथित गिरोह का खुलासा करते हुए महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह अब तक चार लोगों को हनीट्रैप में फंसाकर करीब 24 लाख रुपये की धनउगाही कर चुका था। कई अन्य संभावित पीड़ितों के संबंध में जांच जारी है।

रविवार को पुलिस लाइन सभागार में डीआईजी बस्ती परिक्षेत्र संजीव त्यागी ने एसपी यशवीर सिंह के साथ प्रेसवार्ता कर मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 29 अगस्त को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सरकारी आवास में सूर्य प्रकाश सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उनके पुत्र संदीप सिंह की पांच सितंबर को दी गई तहरीर के आधार पर कोतवाली बस्ती में मुकदमा अपराध संख्या 387/2026, धारा 108 व 3(5) बीएनएस के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।

सोशल मीडिया और वीडियो कॉल से जाल में फंसाने का आरोप

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार प्रियंका चौधरी इस कथित गिरोह की मुख्य आरोपी है। वह करीब 10 वर्ष से पति से अलग रह रही है और मुंबई में ब्यूटी पार्लर व स्पा सेंटर में काम कर चुकी है। आरोप है कि वह पैसे वाले लोगों को सोशल मीडिया, वीडियो कॉल और चैटिंग के जरिए अपने जाल में फंसाती थी। इसके बाद कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो-ऑडियो के जरिए ब्लैकमेल कर रकम की मांग की जाती थी।

पुलिस का दावा है कि प्रियंका के पिता रामनयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव भी इस पूरे खेल में उसका सहयोग करते थे। दोनों कथित तौर पर पीड़ितों से रकम वसूलने में भूमिका निभाते थे और इसमें हिस्सा लेते थे।

डॉक्टर और कारोबारी समेत तीन से लाखों की वसूली का दावा

पुलिस के मुताबिक, जांच में अब तक डॉ. उमेश से चार लाख, अहमद रजा से पांच लाख और मध्य प्रदेश के आर्यन दीक्षित उर्फ जितेंद्र दीक्षित से 15 लाख रुपये की कथित वसूली की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने चौथे मामले में स्व. सूर्य प्रकाश सिंह को भी हनीट्रैप का कथित शिकार बताया है।

जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि करीब दो वर्ष पहले इसी तरह कथित रूप से वसूली गई रकम से प्रियंका ने बोलेरो खरीदी थी। बाद में बोलेरो चालक अहमद रजा को भी कथित तौर पर हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल किया गया। पुलिस के अनुसार, जिस मकान में प्रियंका और उसके पिता किराये पर रहते थे, उसके मालिक डॉ. उमेश को भी कथित तौर पर इसी तरह ब्लैकमेल कर रकम वसूली गई।

मौत से पहले विजय की अंतिम कॉल

डीआईजी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण में सूर्य प्रकाश सिंह का संपर्क प्रियंका और उसके सहयोगी विजय प्रकाश से होने की पुष्टि हुई है। पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन दोपहर 1:41 बजे विजय प्रकाश ने सूर्य प्रकाश सिंह को अंतिम कॉल की थी। पुलिस ने कॉलिंग पैटर्न और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर कथित ब्लैकमेलिंग व प्रताड़ना को आत्महत्या की अहम कड़ी माना है।

पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े दर्जनों संभावित पीड़ितों और वित्तीय लेनदेन की जांच अभी जारी है।

अस्पताल चौराहे के पास से हुई गिरफ्तारी

पुलिस ने प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और विजय प्रकाश को रविवार सुबह 7:55 बजे सदर अस्पताल के सामने से बोलेरो संख्या यूपी51बीएन-5805 के साथ गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बरामद वाहनों और मोबाइल को विवेचना में शामिल कर लिया है।

गिरफ्तारी करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक बृजानंद सिंह, उपनिरीक्षक अजय कुमार यादव, जयविन्द सिंह और शेषनाथ यादव, हेड कांस्टेबल देवेश तथा कांस्टेबल किशन सिंह, संतोष कुमार, स्कंद यादव और राकेश यादव शामिल रहे।

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