पूर्वांचल में अब कॉर्निया ट्रांसप्लांट की राह आसान, संगम आई हॉस्पिटल को सरकारी लाइसेंस
पांच साल के लिए मिली आधिकारिक अनुमति, गंभीर कॉर्निया रोगियों को गोरखपुर में ही मिल सकेगा अत्याधुनिक उपचार
गोरखपुर। नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में पूर्वांचल के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। संगम सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल, गोरखपुर को कॉर्निया ट्रांसप्लांट करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय से आधिकारिक पंजीकरण और अनुमति मिल गई है। यह अनुमति भारत सरकार के ह्यूमन ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांटेशन अधिनियम (THOTA) के तहत प्रदान की गई है। पंजीकरण 31 अगस्त 2026 से पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा।
इस अनुमति के बाद कॉर्निया संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए गोरखपुर में ही उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। कॉर्निया में सफेदी या अपारदर्शिता, गंभीर संक्रमण, चोट, कॉर्नियल डिस्टॉफी और अन्य कारणों से दृष्टि प्रभावित होने वाले मरीजों को जरूरत के अनुसार कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा मिल सकेगी। इससे मरीजों को उपचार के लिए बड़े शहरों की ओर जाने की परेशानी कम होने की उम्मीद है।
नेत्रदान से किसी की दुनिया हो सकती है रोशन
अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर एवं वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. वाई. सिंह ने इस उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सरकारी मान्यता अस्पताल के साथ-साथ पूरे पूर्वांचल के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अस्पताल का प्रयास रहेगा कि कॉर्निया संबंधी बीमारी के कारण दृष्टि खो चुके जरूरतमंद मरीजों को विशेषज्ञ और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने बताया कि कॉर्निया आंख का पारदर्शी अगला हिस्सा है, जिसके जरिए प्रकाश आंख के भीतर प्रवेश करता है। गंभीर चोट या बीमारी के कारण कॉर्निया के अपारदर्शी हो जाने पर सामान्य दवाओं या चश्मे से दृष्टि वापस लाना संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में कई मरीजों के लिए कॉर्निया ट्रांसप्लांट दृष्टि बहाल करने का प्रभावी उपचार हो सकता है।
डोनर कॉर्निया की उपलब्धता बड़ी चुनौती
डॉ. सिंह ने कहा कि देश में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस अब भी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। कॉर्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले मरीजों की संख्या की तुलना में उपलब्ध डोनर कॉर्निया कम हैं। ऐसे में नेत्रदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि नेत्रदान और कॉर्निया ट्रांसप्लांट एक-दूसरे से सीधे जुड़े हैं। किसी व्यक्ति के नेत्रदान से प्राप्त स्वस्थ कॉर्नियल ऊतक किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में दृष्टि का उजाला ला सकता है और उसे आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकता है।
नेत्रदान पखवाड़े में उपलब्धि बनी खास
अस्पताल में कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा अनुभवी कॉर्निया विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। अस्पताल प्रबंधक अलका सिंह ने इसे अस्पताल के सामाजिक दायित्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि 25 अगस्त से आठ सितंबर तक मनाए जा रहे नेत्रदान जागरूकता पखवाड़े के दौरान मिली यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने लोगों से नेत्रदान के प्रति जागरूक होने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की।















