गीडा में सीईटीपी बैठक में प्रदूषण विभाग की अनुपस्थिति पर भड़के उद्यमी रेड जोन सूची और संचालन शुल्क पर उठे सवाल, उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ न डालने की मांग

गीडा में सीईटीपी बैठक में प्रदूषण विभाग की अनुपस्थिति पर भड़के उद्यमी

रेड जोन सूची और संचालन शुल्क पर उठे सवाल, उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ न डालने की मांग

गोरखपुर। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) कार्यालय में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की स्थापना को लेकर आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में उस समय उद्यमियों ने नाराजगी जताई, जब प्रदूषण नियंत्रण विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बैठक में उपस्थित नहीं हुए। एडीएम प्रशासन डॉ. वेद प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने विभाग की अनुपस्थिति को गंभीर लापरवाही बताते हुए असंतोष व्यक्त किया।

बैठक में दो-दो एमएलडी क्षमता वाले सीईटीपी की स्थापना का प्रस्तुतीकरण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना पर लगभग 54 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके संचालन एवं रखरखाव के लिए उद्योगों से 26 रुपये प्रति केएलडी की दर से शुल्क प्रस्तावित है।

इस प्रस्ताव पर उद्यमियों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि सभी इकाइयों से समान शुल्क वसूलना न्यायसंगत नहीं है। कम प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों और अधिक प्रदूषण उत्पन्न करने वाले उद्योगों के लिए अलग-अलग शुल्क संरचना तय की जानी चाहिए। उद्यमियों ने कहा कि प्रदूषण के स्तर के अनुसार शुल्क निर्धारण अधिक व्यावहारिक और उचित होगा।

बैठक में रेड जोन में शामिल उद्योगों की सूची पर भी सवाल उठाए गए। उद्यमियों का कहना था कि वर्तमान सूची पुरानी हो चुकी है और इसमें शामिल 55 इकाइयों का पुनः सर्वे कराया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि नई परिस्थितियों के अनुरूप रेड, ऑरेंज और ग्रीन श्रेणी का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।

उद्योग प्रतिनिधियों ने यह भी सुझाव दिया कि सीईटीपी संचालन पर आने वाले खर्च का कुछ हिस्सा गीडा प्रशासन वहन करे, ताकि उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और परियोजना को लेकर व्यापक सहमति बन सके।

बैठक में प्रमुख उद्यमी आरएन सिंह, दीपक कारीवाल, अशोक शाह, फैजान अहमद, बृजेश अग्रहरि सहित बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उद्यमियों ने स्पष्ट कहा कि उनकी आपत्तियों और सुझावों पर विचार किए बिना सीईटीपी परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करना संभव नहीं होगा।

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