19 करोड़ की जीएसटी चोरी का भंडाफोड़, 50-50 हजार के दो इनामी आरोपी दिल्ली से गिरफ्तार
संतकबीरनगर पुलिस और एसटीएफ लखनऊ की संयुक्त कार्रवाई, फर्जी फर्मों के जरिए चल रहा था करोड़ों का कर चोरी नेटवर्क
संतकबीरनगर। संतकबीरनगर पुलिस ने एसटीएफ लखनऊ के सहयोग से करोड़ों रुपये की जीएसटी कर चोरी और फर्जी बिलिंग के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 50-50 हजार रुपये के दो इनामी आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर फर्जी फर्में बनाकर करोड़ों रुपये का बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) उपलब्ध कराने और सरकार को भारी राजस्व क्षति पहुंचाने का आरोप है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह एवं क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह (थाना मेहदावल) तथा प्रभारी निरीक्षक जयप्रकाश दूबे (कोतवाली खलीलाबाद) के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने एसटीएफ लखनऊ के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को दिल्ली के हरिनगर क्लॉक टावर क्षेत्र से गिरफ्तार किया।
फर्जी फर्मों के सहारे करोड़ों का खेल
जांच में सामने आया कि आरोपी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सरकारी पोर्टल पर अस्तित्वहीन फर्मों का पंजीकरण कराते थे। इसके बाद इन फर्मों के नाम पर फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन, नकली इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक व्यापारिक फर्मों को बोगस खरीद दर्शाकर भारी मात्रा में इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध कराया जाता था, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचता था।
पुलिस के अनुसार गिरोह व्हाट्सएप ग्रुप और विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित होता था। फर्जी लेन-देन को वैध दिखाने के लिए बैंक खातों में धनराशि भेजकर उसे विभिन्न खातों में घुमाया जाता था और बाद में नकद निकालकर वापस कर दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया को ‘सर्कुलर ट्रेडिंग’ के माध्यम से अंजाम दिया जाता था।
18.96 करोड़ रुपये का बोगस आईटीसी
मामले की शुरुआत 3 जुलाई 2025 को हुई थी, जब राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त अरविंद कुमार ने कोतवाली खलीलाबाद में तहरीर देकर शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में पाया गया कि सर्वश्री यादव इंटरप्राइजेज नामक फर्म ने बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के करीब 18.96 करोड़ रुपये का बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम किया था।
जांच में यह भी सामने आया कि अल्फा इंटरप्राइजेज, गुरुग्राम और राधे इंटरप्राइजेज, दिल्ली जैसी फर्मों के माध्यम से भी फर्जी लेन-देन दिखाकर बड़े पैमाने पर कर चोरी की गई। इस मामले में थाना कोतवाली खलीलाबाद में मुकदमा संख्या 577/2025 दर्ज किया गया था।
पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं दो आरोपी
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह से जुड़े दो अन्य आरोपी संदीप कुमार और अमन उपाध्याय को 13 फरवरी 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर मामले में आईटी एक्ट एवं जीएसटी एक्ट की गंभीर धाराएं भी बढ़ाई गई थीं।
दिल्ली से दबोचे गए दोनों इनामी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सौरभ अग्रवाल उर्फ सन्नी निवासी हरिनगर, नई दिल्ली तथा अजीत कुमार निवासी कैलाशपुरी एक्सटेंशन, साउथ वेस्ट दिल्ली के रूप में हुई है। दोनों आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे और उनकी गिरफ्तारी पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
टीमवर्क से मिली बड़ी सफलता
इस कार्रवाई में थाना मेहदावल के प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह, कांस्टेबल धीरेंद्र प्रताप सिंह, अनिकेश यादव तथा एसटीएफ लखनऊ के निरीक्षक शैलेन्द्र कुमार, हेड कांस्टेबल वीर प्रताप, अजीत कुमार सिंह, सुरेश सिंह एवं मुनेन्द्र सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल कर चोरी का मामला नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध का बड़ा नेटवर्क है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, फर्जी फर्मों और वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
कर चोरी के खिलाफ संतकबीरनगर पुलिस और एसटीएफ की यह संयुक्त कार्रवाई आर्थिक अपराधों पर प्रभावी प्रहार मानी जा रही है।















