महिला एवं बाल संरक्षण योजनाओं की समीक्षा: लंबित मामलों में त्वरित कार्रवाई के सख्त निर्देश
गोरखपुर। महिला एवं बाल कल्याण की योजनाओं को प्रभावी बनाने और पीड़ितों को समय से न्याय दिलाने के उद्देश्य से विकास भवन सभागार में महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मिशन शक्ति, रानी लक्ष्मीबाई योजना, गोरखपुर बाल कल्याण योजना सहित अन्य कार्यक्रमों की प्रगति की गहन समीक्षा की गई।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि लंबित मामलों में फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) रिपोर्ट मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वर्तमान में धारा 304-बी के 7 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा-4 के 3 मामले न्यायालय में प्रस्तुत हैं। इनकी नियमित मॉनिटरिंग कर शीघ्र निस्तारण पर जोर दिया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री बाल आश्रय गृह, किशोर न्याय बोर्ड, खुटहन बाल सुधार गृह और सेमरा एकल श्रमजीवी महिला छात्रावास की व्यवस्थाओं की समीक्षा हुई। बच्चों एवं महिलाओं को सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
विशेष फोकस मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास (500 बेड क्षमता) के निर्माण पर रहा। नगर निगम क्षेत्र में बनने वाला यह जी+5 बहुमंजिला भवन कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित एवं सस्ती आवास सुविधा देगा। इसमें 2 लिफ्ट, 400 केवीए ट्रांसफार्मर, डीजी सेट, सीसीटीवी, एसी, अग्निशमन प्रणाली, वर्षा जल संचयन, दिव्यांगजन हितैषी डिजाइन सहित आधुनिक सुविधाएं होंगी।
परियोजना की आंकलित लागत 4738.47 लाख रुपये है, जिसे उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम से कराया जाएगा। निर्माण में गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और समय-सीमा से कोई समझौता न करने के सख्त निर्देश दिए गए।
जिला विकास अधिकारी राजमणि वर्मा ने कहा कि शासन की मंशा है कि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचे। सीएमओ डॉ. राजेश झा ने समयबद्ध चिकित्सा परीक्षण, एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने निष्पक्ष कार्रवाई और जिला प्रोबेशन अधिकारी समर बहादुर ने प्रभावी क्रियान्वयन का आश्वासन दिया।
बैठक में नियमित समीक्षा का निर्णय लिया गया ताकि सभी कार्य समय से पूर्ण हों और जरूरतमंदों को पारदर्शी लाभ मिले।















