साइबर अपराध पर नकेल: पुलिस की नई रणनीति, साइबर ट्रेनिंग अनिवार्य।

साइबर अपराध पर नकेल: पुलिस की नई रणनीति, साइबर ट्रेनिंग अनिवार्य।

 

संतकबीरनगर। साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने व्यापक रणनीति अपनाई है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्णा के निर्देश पर सभी थानों में साइबर सेल को और प्रभावी बनाने के लिए इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर को सीवाई ट्रेन पोर्टल पर तीन महीने की अनिवार्य ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी। बिना प्रशिक्षण के कोई भी थानाध्यक्ष (एसओ) नहीं बन सकेगा। जिला स्तर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) को साइबर नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा।

 

डीजीपी ने सभी पुलिस कप्तानों को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक थाने की साइबर सेल को मजबूत किया जाए। साइबर सेल और एसओ को साइबर अपराधों की पहचान, जांच और रोकथाम के लिए प्रशिक्षित करना अनिवार्य होगा। प्रशिक्षण के बाद एक डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिसमें कर्मियों की दक्षता और प्रशिक्षण स्थिति दर्ज होगी। पहले से प्रशिक्षित कर्मियों को भी दोबारा प्रशिक्षण लेना होगा। साइबर सेल में तैनात कर्मी न्यूनतम 2 और अधिकतम 5 वर्ष तक कार्य करेंगे। 

 

साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में पहले 5 लाख रुपये की सीमा थी, जिसे अब हटा दिया गया है। अब सभी साइबर अपराधों के केस साइबर थानों में दर्ज होंगे और उनकी विवेचना होगी। आईटी एक्ट और साइबर थानों की विवेचनाओं की मासिक समीक्षा राजपत्रित अधिकारियों द्वारा होगी। विवेचनाओं के स्थानांतरण के लिए सामान्य नियम लागू होंगे। सभी इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को सीवाई ट्रेन पोर्टल पर पंजीकरण कर 3-4 महीने में प्रशिक्षण पूरा करना होगा। 

 

प्रदेश में साइबर जागरूकता को बढ़ाने के लिए अगले 6 महीनों में हर घर तक अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम होंगे। 15 पुलिस कर्मी पहले ही साइबर कमांडो प्रशिक्षण ले चुके हैं, जिनमें से प्रत्येक जोन में एक कमांडो तैनात होगा, शेष 7 साइबर क्राइम मुख्यालय पर रहेंगे। ये कमांडो विवेचकों को सहायता प्रदान करेंगे। 

 

एसपी संदीप कुमार मीना ने बताया कि यह प्रशिक्षण साइबर अपराधों की जटिलताओं को समझने और आधुनिक तकनीकों से निपटने के लिए जरूरी है। साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, और फिशिंग जैसे अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए पुलिस को हाईटेक बनाना समय की मांग है। यह कदम न केवल पुलिस की क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि जनता को साइबर अपराधों से बचाने में भी मददगार होगा।

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