लिवर रोगों का आयुर्वेद व होमियोपैथी में प्रभावी इलाज: विश्व लिवर दिवस
गोरखपुर। संतकबीरनगर: विश्व लिवर दिवस पर होमियोपैथिक डॉ. उमेश चंद्रा ने बताया कि लिवर के रोगों का आयुर्वेद और होमियोपैथी में सटीक इलाज संभव है। स्वस्थ लिवर बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, लेकिन फैटी लिवर और लिवर सिरोसिस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। रिम्स के मेडिसिन विभाग के अनुसार, 90% मामले लिवर सिरोसिस से जुड़े हैं। समय पर इलाज से ठीक होने की संभावना रहती है, वरना मरीज को हमेशा दवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विशेषज्ञों के मुताबिक, ओपीडी में 40% मरीज फैटी लिवर से पीड़ित हैं, जिसका मुख्य कारण गतिहीन जीवनशैली और तैलीय भोजन है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि खानपान में सुधार जरूरी है। बर्गर, पिज्जा, समोसा जैसे जंक फूड से परहेज करें और शारीरिक गतिविधियां बढ़ाएं। वजन नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है। होमियोपैथिक डॉ. उमेश चंद्रा के हवाले से अल्कोहल को लिवर सिरोसिस का प्रमुख कारण माना जाता है।
अत्यधिक शराब से लिवर सिरोसिस हो सकता है, जिसका इलाज मुश्किल है। लिवर सिरोसिस का एकमात्र समाधान लिवर ट्रांसप्लांट है, लेकिन रिम्स में अभी तक लिवर विभाग और हेपेटोलॉजिस्ट की कमी एक बड़ी समस्या है।
लिवर सिरोसिस के लक्षणों में भूख न लगना, थकान, पेट फूलना, पीलिया, वजन में बदलाव और पेट दर्द शामिल हैं। आयुर्वेद और होमियोपैथी में इनका प्रभावी इलाज मौजूद है। होमियोपैथिक डॉ. उमेश चंद्रा के अनुसार, होमियोपैथी में सालीडोरियम और मैटरम साल्ट जैसी दवाएं लिवर को स्वस्थ रखती हैं। आयुर्वेद में भी लिवर इन्फेक्शन और पीलिया के लिए आरोग्यवर्धिनी बटी, प्लीहारी बटी, यकृधारी लौह, लौह भस्म सतपुट्टी और स्वर्ण माक्षिक भस्म कारगर हैं। इन विधाओं में इलाज लंबा लेकिन स्थायी है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि जंक फूड, रेड मीट, तैलीय भोजन और मीठे से परहेज करें। स्वस्थ जीवनशैली और सही खानपान से लिवर को स्वस्थ रखा जा सकता है।
चेतावनी: बिना चिकित्सकों की सलाह के कोई भी दवा लेना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए डॉ. उमेश चंद्रा, शिवम होम्यो क्लीनिक, गोरखपुर से संपर्क करें।















