सहजन: प्रकृति का वरदान, फायदे अनगिनत, पर सावधानी जरूरी – डॉ. उमेश चंद्रा की सलाह।

सहजन: प्रकृति का वरदान, फायदे अनगिनत, पर सावधानी जरूरी – डॉ. उमेश चंद्रा की सलाह।

गोरखपुर

सहजन, जिसे मोरिंगा ओलेफेरा या ड्रमस्टिक ट्री के नाम से जाना जाता है, भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से औषधीय और पोषक तत्वों का खजाना रहा है। डॉ. उमेश चंद्रा के अनुसार, सहजन के पत्ते, फल, बीज और तने विटामिन ए, सी, कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्वों से भरपूर हैं, जो स्वास्थ्य के लिए वरदान हैं। लेकिन इसके साथ ही, अधिक या अनुचित सेवन से कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। आइए, सहजन के फायदे और सावधानियों को समझें।

सहजन त्वचा के लिए चमत्कारी है। इसकी पत्तियां और फूल सब्जी के रूप में खाने से त्वचा जवां रहती है और समस्याएं दूर होती हैं। महिलाओं के लिए यह मासिक धर्म की परेशानियों और गर्भाशय के स्वास्थ्य में मददगार है। विटामिन सी से भरपूर सहजन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, जुकाम और छाती की जकड़न में राहत देता है। पुरुषों में यह यौन शक्ति और शुक्राणु संख्या बढ़ाने में सहायक है। बवासीर और कब्ज जैसी पाचन समस्याओं में भी सहजन रामबाण है।

हालांकि, डॉ. चंद्रा सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। सहजन पाउडर में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है, जो उच्च रक्तचाप, हृदय और गुर्दे की समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती है। लो ब्लड प्रेशर के मरीजों को इसका सेवन सीमित करना चाहिए, क्योंकि यह उनकी स्थिति को बिगाड़ सकता है। गर्भवती महिलाओं को सहजन से बचना चाहिए, क्योंकि यह गर्भपात का खतरा बढ़ा सकता है। प्रसव के तुरंत बाद भी इसका सेवन जोखिम भरा है। जिन्हें लैक्टोबैसिलस, ग्लूटेन या सल्फाइट्स से एलर्जी है, उन्हें भी सतर्क रहना चाहिए। अधिक सेवन से मानसिक तनाव, अवसाद या ब्लीडिंग
डिसऑर्डर की समस्या हो सकती है, क्योंकि इसमें आइसोथियोसाइनेट जैसे हानिकारक तत्व हो सकते हैं।

डॉ. उमेश चंद्रा का कहना है कि सहजन का संतुलित उपयोग ही इसके लाभों को अधिकतम करता है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है, ऊर्जा बढ़ाता है और शरीर के विभिन्न अंगों को स्वस्थ रखता है। लेकिन बिना चिकित्सकीय सलाह के अत्यधिक सेवन से बचें। सहजन प्रकृति का अनमोल उपहार है, पर इसे बुद्धिमानी से अपनाना जरूरी है।

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