खड़ंजा, नाली और हैंडपंप के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध! पूर्व प्रधान और सचिव ने गटके 11.73 लाख, जांच में खुलासा, वसूली की तलवार लटकी।
संतकबीरनगर। विकास खंड नाथनगर की ग्राम पंचायत भीटीमाफी में पूर्व प्रधान और तत्कालीन सचिव ने सरकारी धन को अपना निजी खजाना समझ लिया। खड़ंजा मरम्मत, नाली निर्माण और हैंडपंप रिबोर के नाम पर बिना काम कराए ही 11,73,586 रुपये हड़प लिए गए। शिकायत के बाद हुई जांच में यह घपला उजागर हुआ। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने सख्त रुख अपनाते हुए पूर्व प्रधान सुबाषचंद को नोटिस जारी कर एक पखवारे में जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर भू-राजस्व बकाया की तरह वसूली और अन्य कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। वहीं, तत्कालीन सचिव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए डीपीआरओ को निर्देश जारी किए गए हैं।
ग्राम घोलवा निवासी बृजेश पांडेय की शिकायत पर डीएम ने 26 सितंबर 2020 को जांच के आदेश दिए थे। उप कृषि निदेशक और सहायक अभियंता जल निगम की टीम ने 27 दिसंबर 2023 को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 2017-18 और 2019-20 के कार्यों में भारी गड़बड़ी पाई गई। जांच में खुलासा हुआ कि खड़ंजा मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये निकाले गए, जबकि मौके पर कोई काम नहीं हुआ। उदाहरण के तौर पर, पिच रोड से ब्रह्मदेव के खेत तक मरम्मत के लिए 30,200 और 46,400 रुपये का भुगतान दिखाया गया, लेकिन वहां अब इंटरलॉकिंग मौजूद है। रोजगार सेवक गिरी शर्मा ने भी मरम्मत कार्य से इनकार किया।
इसी तरह, नाली निर्माण के नाम पर 2,48,900 रुपये और हैंडपंप मरम्मत व रिबोर के लिए 15,900 से 35,200 रुपये तक प्रति कार्य के हिसाब से भुगतान लिया गया, लेकिन ग्रामवासियों ने बताया कि न तो नाली बनी, न ही हैंडपंप ठीक हुए। यह पूरा खेल कागजों पर ही चलता रहा।
डीएम ने साफ कर दिया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पूर्व प्रधान से वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के साथ ही सचिव पर भी कार्रवाई की गाज गिरेगी। यह मामला ग्रामीण विकास में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है।
डीएम महेंद्र सिंह तंवर का बयान – “प्रथम दृष्टया 11,73,586 रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। दोषी पूर्व प्रधान और सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।















