जीवन में अभिमान हुआ तो वह पाप का भागीदार बन जाता: विनय ओझा (ब्यास)
संतकबीरनगर। जो व्यक्ति श्रीमद्भागवत कथा को आत्मसात करता है। वह सांसारिक दुखों से मुक्त हो जाता है। ये बातें नाथनगर के भिटहा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य विनय कुमार ओझा ब्यास ने कही। उन्होंने कहा कि जीवन में यदि मान, बड़ा पद या प्रतिष्ठा मिल जाए तो उसे ईश्वर की कृपा मानकर भलाई के कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन में अभिमान हुआ तो वह पाप का भागीदार बन जाता है। उन्होंने कहा कि कथा सुनने से मानव जीवन में संस्कार का उदय होता है। जीवन में कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न आ जाए मुनष्य को अपना धर्म व संस्कार नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसे ही मनुष्य जीवन के रहस्य को समझ सकते हैं। जिसकी भगवान के चरणों में प्रगाढ़ प्रीति है, वही जीवन धन्य है। ईश्वर ने विभिन्न लीलाओं के माध्यम से जो आदर्श प्रस्तुत किया, उसे हर व्यक्ति को ग्रहण करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन मूल्यों के बारे में जानकारी मिलने के साथ-साथ अपने कर्तव्य को भी समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि श्रंगी ऋषि के श्राप को पूरा करने के लिए तक्षक नामक सांप भेष बदलकर राजा परिक्षित के पास पहुंचकर उन्हें डंस लेते हैं और जहर के प्रभाव से राजा का शरीर जल जाता है और मृत्यु हो जाती है। लेकिन कथा सुनने के प्रभाव से राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्त होता है। आचार्य ने कहा कि कथा के श्रवण करने से जन्म जन्मांतरों के पापों का नाश होता है और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर पूर्व विधायक दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे, डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी, चंद्रावती देवी, राकेश चतुर्वेदी, सविता चतुर्वेदी, अखंड चतुर्वेदी, रविनेश श्रीवास्तव, शरद त्रिपाठी, आशुतोष पांडेय समेत अन्य मौजूद रहे।















