लोन लिए ढाई लाख, कर्जदार हो गए 52 लाख।
-वर्ष 1997 से 2005 तक कारोबार के लिए अल्पसंख्यक वित्तीय विकास निगम से 80 लोगों ने लिया था लोन
-विभाग के जरिए बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी 71 लोगों ने जमा नहीं किया कर्ज की रकम
-शासन ने ऋण जमा नहीं करने वाले कर्जदारों की सूची विभाग को भेजा
-विभाग ने नोटिस जारी कर 30 नवंबर तक रकम जमा करने का दिया अल्टीमेटम
-कर्ज की रकम जमा नहीं करने वालों के खिलाफ आरसी जारी कराएगा विभाग
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संतकबीरनगर।
कारोबार के लिए अल्पसंख्यक वित्तीय विकास निगम से 80 लोगों ने लोन लिया। इसमें से 71 लोगों ने अभी तक लोन की रकम जमा नहीं किया। जिससे ब्याज की रकम बढ़ती गई। नतीजा यह है कि एक कर्जदार ने ढाई लाख का लोन कराया था और वर्तमान में वह 52 लाख का कर्जदार हो गया। विभाग ने पुन: सभी बकाएदारों को नोटिस जारी करके 30 नवंबर तक कर्ज की रकम जमा करने का अल्टीमेटम दिया है। इसके बावजूद यदि रकम जमा नहीं की तो आरसी जारी करा कर भू राजस्व की भांति कर्ज की रकम की वसूली कराएंगा।
वर्ष 1997 से वर्ष 2004-05 तक 80 लोगों ने विभिन्न कारोबार के लिए अल्पसंख्यक वित्तीय विकास निगम से लोन लिया। इसमें किसी ने अंबेसडर टैक्सी तो किसी ने महिंद्रा जीप और फिर पीसीओ टेलीफोन, बजाज आटो, मोटर मैकेनिक, टेलरिंग शॉप, डेयरी यूनिट, कारपेंटर की दुकान, वुड वर्क, रेडीमेट गारमेंट्स आदि उद्योग के लिए लोगों ने लोन लिया। इन्हें मासिक किश्तों में निर्धारित ब्याज दर के साथ विभाग को कर्ज की रकम वापस करना था। इसमें से नौ लोगों ने कर्ज की धनराशि को विभाग में जमा कर दिया। जबकि शेष 71 लोगों ने कर्ज की रकम को जमा नहीं किया। इसमें से कुछ कर्जदारों की मौत हो चुकी है। शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए कर्ज की रकम जमा न करने वालों की सूची जारी की है। इसमें देलहापार के रहने वाले मोहम्मद शमीम ने 26 सितंबर 1997 को 2 लाख 47 हजार 197 रुपये का कर्ज अंबेसडर टैक्सी के लिए लिया था, लेकिन उन्होंने कर्ज की रकम जमा नहीं की। वर्तमान में वे 52 लाख 59 हजार 351 रुपये के कर्जदार हो गए हैं। इसी तरह काजीपुर मगहर के रहने वाले शंहशाह आलम ने 30 जून 1999 को महिंद्रा जीप के लिए 2 लाख 73 हजार 600 रुपये लोन लिया था और अभी तक जमा नहीं किया। वर्तमान में 47 लाख 50 हजार 099.64 रुपये के कर्जदार हो गए हैं। अमरडोभा के रहने वाले नसीउल्लाह ने तीन सितंबर 1997 में वीडियोग्राफी शॉप के लिए 90 हजार 337 रुपये कर्ज लिया था। अभी तक कर्ज की रकम जमा नहीं की। वर्तमान में कर्ज की रकम बढ़ कर 6 लाख 25 हजार 232.34 रुपये हो गई है। इसके अलावा अन्य कर्जदार साढ़े तीन लाख से लेकर सवा दो लाख रुपये तक के कर्जदार बने हुए हैं। शासन ने विभाग को कर्जदारों की सूची भेजकर रकम जमा कराए जाने का निर्देश दिया है।
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वर्ष 1997 से 2005 तक जिले के 80 लोगों ने अल्पसंख्यक वित्तीय विकास निगम से विभिन्न उद्योगों के लिए लोन लिया था। जिन्हें मासिक किश्त में निर्धारित ब्याज दर के साथ विभाग को वापस करना था, लेकिन 71 लोगों ने कर्ज की रकम जमा नहीं की। इसमें दो सबसे बड़े बकाएदार हैं। जिनमें देलहापार निवासी मोहम्मद शमीम पर 52 लाख और काजीपुर मगहर निवासी शहंशाह पर 47 लाख से अधिक का कर्जा बना हुआ है। इसमें कुछ कर्जदारों की मौत भी हो चुकी है। जिनके आश्रितों से कर्ज की रकम वसूली जाएगी। चार-पांच बार नोटिस जारी करने के बाद भी लोग कर्ज की रकम वापस नहीं कर रहे हैं। पुन: नोटिस जारी कर 30 नवंबर तक समय दिया गया है। इसके बावजूद भी यदि रकम जमा नहीं किए तो संबंधितों के खिलाफ आरसी जारी करा कर भू राजस्व की भांति कर्ज की रकम की वसूली कराई जाएगी।
प्रवीण कुमार मिश्र,
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी















