गोरखपुर में 2024 बैच के IAS कुणाल रस्तोगी ने संभाला पदभार BITS पिलानी से सिविल इंजीनियरिंग के बाद सिविल सेवा में चयन, अब ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी

गोरखपुर में 2024 बैच के IAS कुणाल रस्तोगी ने संभाला पदभार

BITS पिलानी से सिविल इंजीनियरिंग के बाद सिविल सेवा में चयन, अब ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी

गोरखपुर। 2024 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी कुणाल रस्तोगी ने शनिवार को गोरखपुर पहुंचकर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी ज्वाइनिंग पूरी की। अब जिलाधिकारी दीपक मीणा प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार उन्हें जिले की किसी तहसील की जिम्मेदारी सौंपेंगे।

मूलरूप से लखनऊ के रहने वाले कुणाल रस्तोगी ने BITS पिलानी से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने सिविल सेवा को करियर के रूप में चुना। सफलता हासिल करने से पहले उन्हें कई चुनौतियों और असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी कमियों को पहचानकर तैयारी जारी रखी।

तीन प्रयास के बाद हासिल की मंजिल

कुणाल ने सिविल सेवा परीक्षा के लिए तीन प्रयास किए। पहले प्रयास में उन्होंने त्रिपुरा कैडर से परीक्षा दी, लेकिन इंटरव्यू चरण में सफलता नहीं मिली। दूसरे प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा भी पार नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और कमियों पर काम करते हुए तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थान बनाया।

सिविल सेवा अभ्यर्थियों को वह शॉर्टकट से बचने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले सिलेबस को अच्छी तरह समझना और उसी के अनुरूप सीमित एवं उपयोगी स्रोतों से पढ़ाई करना जरूरी है। बार-बार किताबें बदलने के बजाय एक अच्छे स्रोत का कई बार अध्ययन अधिक प्रभावी रहता है।

93.5 प्रतिशत से हाईस्कूल, 96.5 प्रतिशत से इंटर

कुणाल की स्कूली शिक्षा भी अलग-अलग शहरों में हुई। उन्होंने वर्ष 2014 में अगरतला, त्रिपुरा के होली क्रॉस स्कूल से हाईस्कूल की परीक्षा 93.5 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। वर्ष 2016 में लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, गोमतीनगर से इंटरमीडिएट की परीक्षा 96.5 प्रतिशत अंकों के साथ पास की।

उनके पिता पुनीत रस्तोगी आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में बीएसएफ में एडीजी पद पर तैनात हैं। पिता की नौकरी के दौरान अलग-अलग स्थानों पर हुई तैनाती और तबादलों के कारण कुणाल को बचपन से ही विभिन्न क्षेत्रों, संस्कृतियों और सामाजिक परिस्थितियों को करीब से देखने का अवसर मिला। उनका मानना है कि इन अनुभवों ने समाज को व्यापक दृष्टिकोण से समझने में उनकी मदद की।

परिवार में भी शिक्षा और सेवा का माहौल रहा है। उनकी मां नीमा रस्तोगी गृहिणी हैं, जबकि छोटी बहन पूर्णिमा रस्तोगी एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। सिविल सेवा में चयन की सूचना मिलने पर परिवार में खुशी का माहौल रहा। कुणाल के मुताबिक, उनकी सफलता की खबर सुनकर उनकी मां भावुक हो गई थीं।

अब प्रशासनिक जिम्मेदारी का इंतजार

गोरखपुर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का पद संभालने के बाद अब उनके कार्यक्षेत्र को लेकर निर्णय होना है। तहसील की जिम्मेदारी मिलने पर राजस्व मामलों के निस्तारण, जनसमस्याओं के समाधान, सरकारी योजनाओं की निगरानी और शासन की प्राथमिकताओं को धरातल पर लागू कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रशासनिक सेवा में उनके अनुभव और युवा ऊर्जा का लाभ जिले को मिलने की उम्मीद है।

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