श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर कृष्ण-सुदामा प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु
दान-दक्षिणा देकर कथा व्यास का लिया आशीर्वाद, मझौवा एकडंगा में कथा का समापन
संतकबीरनगर।
मझौवा एकडंगा गांव में प्राचार्य वेद प्रकाश पांडेय के आयोजन में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार को विधिवत समापन हो गया। विश्राम दिवस पर श्रद्धालु कृष्ण-सुदामा प्रसंग सुनकर भाव-विभोर हो उठे।
कार्यक्रम में सूर्या ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी, पूर्व प्रमुख राकेश चतुर्वेदी और जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव ने व्यास पीठ की आरती उतारी तथा कथा व्यास आचार्य धीरज कृष्ण शास्त्री सहित अन्य आचार्यों को अंगवस्त्र एवं दान-दक्षिणा भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा समापन के अवसर पर अयोध्या धाम से पधारे आचार्य धीरज कृष्ण शास्त्री ने श्रीकृष्ण-सुदामा चरित का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर द्वारिका धाम भगवान श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे। द्वार पर पहरेदार ने उनकी दीन-हीन अवस्था देखकर उन्हें रोक लिया, लेकिन जैसे ही श्रीकृष्ण को उनके आगमन का समाचार मिला, वे स्वयं नंगे पांव दौड़ते हुए द्वार पर पहुंचे और अपने मित्र का आदरपूर्वक स्वागत किया।
सुदामा की स्थिति देखकर भगवान श्रीकृष्ण भावुक हो उठे और प्रेमवश उनके चरणों को अश्रुओं से धोया। जब सुदामा ने संकोचवश चावल की पोटली छिपानी चाही, तब भगवान ने स्वयं उसे लेकर दो मुट्ठी चावल ग्रहण किए और उन्हें समृद्धि का आशीर्वाद दिया। तीसरी मुट्ठी लेने से रुक्मिणी जी ने उन्हें रोक दिया।
कथा के समापन प्रसंग में शुकदेव जी द्वारा कथा विश्राम और तक्षक नाग द्वारा राजा परीक्षित के दंश का उल्लेख करते हुए उनके परमधाम गमन का वर्णन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य यजमान आदित्य प्रकाश पांडेय एवं श्रीमती कुशलावती देवी, प्राचार्य वेद प्रकाश पांडेय, मनोज पांडेय, निहाल चंद्र पांडेय, अंकित पाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।















