घट रही पुलिस की हनक, दावे पर सवाल।

घट रही पुलिस की हनक, दावे पर सवाल।

 

– जिले में पटेल चौक व घघौवा में पुलिस चौकी पर वर्दी हुई शर्मसार

– जन सुरक्षा का दावा.. खुद की सुरक्षा पर उठने लगा सवाल

उत्तर प्रदेश। बस्ती। जिले में जहां घटनाओं को लेकर अधिकारियों का दावा है कि पुलिस बेहद संवेदनशील है, मगर यहां तो स्थिति कुछ इस कदर बिगड गई है, जिसके चलते वर्दी का भरोसा कम हाे रहा है। यही नहीं जिले में सप्ताह भीतर दो घटनाओं ने वर्दी के रसूख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं में पुलिस शर्मसार हुई ही तमाम आरोप भी लगाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि इन घटनाओं के साथ ही सुरक्षा की पूरी व्यवस्था हासिए पर पहुंच गई है। उसका कारण सभी जान रहे हैं।

शहरी क्षेत्र के पटेल चौक पर चंद रोज पहले जाम को लेकर विवाद हुआ। चौकी पर कुछ लोगों को पुलिस ने बैठा लिया। इसकी भनक लगते ही वहां ग्रामीण एकत्रित हो गए। पुलिस की पिटाई तो हुई ही बैठाए गए लोगों को ग्रामीण छुड़ा ले गए। पुलिस हाथ मलती रही। इसकी जानकारी के बाद वर्दी का दम भरने वाले अधिकारी सकते में आ गए। पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर अपनी पीठ थपथपाई। इस घटना के अभी एक सप्ताह भी नहीं बीता था कि मंगलवार को वर्दी को फिर से शर्मसार होना पड़ा। यहां परशुरामपुर थाना क्षेत्र के घघौआ चौकी पर एक महिला व ग्रामीणों ने पुलिस को खूब खरी खोटी सुनाई। चौकी के रखवालों पर आरोप है कि महिला को वह बैठा लिए थे। इसका वीडियो भी वायरल हुआ। उजाला 24*7 वीडियो की पुष्टि तो नहीं करता, मगर पुलिस का रवैया व आम जन का विरोध यह साबित कर रहा है कि जनता का पुलिस ने भरोसा उठ चुका है और अब वर्दी में कोई दम नहीं रहा।

आम लोग का कारण दबी जुबान पुलिस के कुछ खास अधिकारियों को देते हैं। इनका कहना है कि दोषियों पर कार्रवाई से बचाने के लिए पुलिस तमाम रास्ते निकालती है, निर्दोष को फसाने के लिए पूरी ताकत झोंक देती है। जिले के थानाें में तमाम रिपोर्ट ऐसे ही दर्ज किए जा रहे हैं जहां रसूख व भय नजर आता है।

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बोले एएसपी

एएसपी ओपी सिंह ने कहा कि पुलिस जनता के हितों को सर्वोपरि मानती है। पटेल चौक हो या फिर घघौआ चौकी दोनो स्थानों पर जनता की सुरक्षा को लेकर पुलिस काम कर रही थी, जहां कुछ लोग वीडियो बनाने लगे थे। उन्हें उम्मीद थी कि इससे उन्हें आसानी से न्याय मिल जाएगा। ऐसा नहीं है। यदि कहीं आम जन को कोई दिक्कत आती है उसकी सुनी नहीं जाती है साथ ही उसके लिए अन्य फोरम भी हैं। वहां अपनी बात पहुंचानी चाहिए। वर्दी का भरोसा और रसूख दोनो कायम है। आज भी आम जन का इसी तंत्र पर विश्वास है।

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