भू माफिया के मिली भगत से रजिस्ट्री आफिस का खेल निराला रजिस्ट्री के बाद रूपये की ताकत से बदल गयी पेपर, दूसरे गांव के रजिस्ट्री की लगा दी गयी छाया प्रति।

भू माफिया के मिली भगत से रजिस्ट्री आफिस का खेल निराला

रजिस्ट्री के बाद रूपये की ताकत से बदल गयी पेपर, दूसरे
गांव के रजिस्ट्री की लगा दी गयी छाया प्रति

गोरखपुर। सरकार लगातार भू-माफियाओं के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही किये जाने का निर्देश देती चली आ रही है। लेकिन
राजस्व विभाग से जुड़े भू-माफियाओं का दबदबा जारी है जैसा कि रजिस्ट्री कार्यालय के अन्दर भी की सांठ-गांठ अंकुरित है। जिससे आम गरीब जनमानस के साथ धोखा हो जा रहा है। ऐसे ही मामला महानगर के समीप जंगल छत्रधारी गांव में हुए वर्ष
2000 में आ. न. 799 व 780 रकबा 15 डिसील की रजिस्ट्री में हुआ है। मालूम हो कि ग्राम जंगल छत्रधारी निवासी सोमन नाम के एक गरीब व्यक्ति ने गांव के ही खदेरू से आ. न. 779 व 780 में 15 डिस्मील भूमि 24-11-2000
को रजिस्ट्री कराया तो उसी दिन एक भू माफिया ने जमा हुई छाया प्रति स्टेम्प को हटा कर दूसरे गांव
जंगल माझी की हुई रजिस्ट्री जिसकी आराजी नंबर भी दूसरी है।जिसकी छाया प्रति जंगल छात्रधारी की हुई रजिस्ट्री में लगवा दिया। जंगल छत्रधारी की
हुई असली रजिस्ट्री को सहायक चकबन्दी अधिकारी द्वारा वर्ष 2001 में खारिज दाखिला कर दिया गया।फर्जीवाडे करने के महारथियों के कारनामें का पता तब चला कि जब वर्ष 2021 में सोमन उक्त आराजी को रजिस्ट्री करने रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचा। फर्जीवाडा करने वाली टीम ने पुनः खदेरू का नाम चढ़वा दिया। थक हार के सोमन पुनः राजस्व न्यायालय में पहुंचा तो स्वर्गीय खदेरू के पुत्र अमरजीत ने आपत्ति कर दिया क्योंकि काश्तकार खदेरू की मृत्यु के बाद उनके पुत्र अमरजीत का नाम भूमाफियाओं ने दर्ज कर दिया मामला न्यायालय में लंबित है । मजे की बात रही कि बिक्री हुई उपरोक्त आराजी को अमरजीत ने प्रदीप नामक व्यक्ति को रजिस्ट्री कर दिया भूमाफियाओं द्वारा जंगल माझी की लगाई गई पात्र पत्र से पता चला की माझी गांव में स्वर्गीय खदेरू की भूमि नहीं है बता दे कि सोमन के पक्ष में स्वर्गीय खदेरू की पुत्री व गवाहान ने स्पष्ट बयान दर्ज कराया कि स्वर्गीय खदेरू ने जंगल छत्रधारी के आराजी नंबर 779 व 780 में 15 डिसमिल जमीन सोमन को रजिस्ट्री किया था सूत्रों की माने तो प्रमोद नामक व्यक्ति ने ही रजिस्ट्री ऑफिस में हेरा फेरी किया और फिर उसी आराजी नंबर की रजिस्ट्री करा लिया सूत्र बताते हैं कि प्रमोद का मामला नायब तहसीलदार पिपराइच के न्यायालय में है तथा सोमन का न्यायिक नायब तहसीलदार के न्यायालय में लंबित है सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2000 में हुई सोमन की रजिस्ट्री में रजिस्ट्री कार्यालय के प्रपत्रों की हेरा फेरी नहीं हुई होती तो आज गरीब सोमन दर दर भटकने को मजबूर नहीं होता।

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