आंखों पर काली पट्टी बांधकर निकली ‘अंधत्व-बोध पदयात्रा’
नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए चिकित्सकों और नागरिकों ने दिया संदेश
गोरखपुर,। नेत्रदान के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने और दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन की कठिनाइयों का समाज को एहसास कराने के उद्देश्य से भारतीय चिकित्सा संघ गोरखपुर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के नेत्र रोग विभाग और गोरखपुर नेत्र रोग विशेषज्ञ संघ के संयुक्त तत्वावधान में नेत्रदान जागरूकता एवं अंधत्व-बोध पदयात्रा निकाली गई।
पदयात्रा में शामिल लोगों ने आंखों पर काली पट्टी बांधकर नौकायन स्थल से चंपा देवी पार्क तक पैदल मार्च किया और वापस नौकायन स्थल पहुंचे। काली पट्टी बांधकर पदयात्रा का उद्देश्य कुछ समय के लिए दृष्टिहीनता का अनुभव कराना और यह समझाना था कि दृष्टिहीन व्यक्ति को रोजमर्रा के जीवन में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
भारतीय चिकित्सा संघ गोरखपुर के सचिव एवं वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. वाई. सिंह ने कहा कि पदयात्रा का उद्देश्य लोगों को दृष्टिहीनता की वास्तविक कठिनाइयों से अवगत कराने के साथ नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना है। मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेकर किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है। एक व्यक्ति का नेत्रदान दो जरूरतमंद लोगों को दृष्टि प्रदान करने में सहायक हो सकता है।
पदयात्रा में बड़ी संख्या में चिकित्सक, सहायक चिकित्सा कर्मी, चिकित्सा संस्थानों के कर्मचारी और आम नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. अलका त्रिपाठी एवं डॉ. सतीश जायसवाल ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता से नेत्रदान को जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।
कार्यक्रम में डॉ. राजीव पांडे, डॉ. नेहा सिंह, डॉ. नरेंद्र देव, डॉ. दिनेश चंद्र, डॉ. शैलेश मौर्य, डॉ. अमरेश सिंह, डॉ. अनिल श्रीवास्तव, डॉ. शशांक कुमार, डॉ. रिचा अग्रवाल, डॉ. महेंद्र अग्रवाल, डॉ. डीके सिंह, डॉ. एके सिंह, डॉ. महेंद्र बुदलकोठी, डॉ. महेंद्र गुप्ता, डॉ. आरपी सिंह सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक, सहायक चिकित्सा कर्मी और नागरिक मौजूद रहे।
आयोजकों ने लोगों से मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की, ताकि किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाई जा सके।















