थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह के निधन से पुलिस विभाग में शोक, पुलिस लाइन में दी भावभीनी श्रद्धांजलि एसपी समेत अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर दी अंतिम विदाई, नम हुईं आंखें

थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह के निधन से पुलिस विभाग में शोक, पुलिस लाइन में दी भावभीनी श्रद्धांजलि

एसपी समेत अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर दी अंतिम विदाई, नम हुईं आंखें

बस्ती। थाना वाल्टरगंज के थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक सूर्य प्रकाश सिंह के असामयिक निधन से पुलिस विभाग में शोक की लहर है। शनिवार को पुलिस लाइन में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम श्रद्धांजलि दी गई। पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक समेत अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शोक धुन के बीच उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर और शोक सलामी दी गई।

पुलिस के अनुसार, 29 अगस्त को दोपहर बाद सूर्य प्रकाश सिंह अपने सरकारी आवास पर गए थे। शाम को उनसे संपर्क नहीं हो पाने पर सहकर्मियों ने आवास पहुंचकर जानकारी ली। बाद में कमरे में उनका शव मिला। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई।

मृतक सूर्य प्रकाश सिंह मूल रूप से भीलमपुर छपरा, थाना अतरौलिया, जनपद आजमगढ़ के निवासी थे। पुलिस विभाग में उनकी लंबी सेवा रही। वह 15 फरवरी 1988 को आरक्षी पद पर भर्ती हुए थे। इसके बाद 7 सितंबर 2008 को हेड कांस्टेबल तथा 11 नवंबर 2016 को वरिष्ठता के आधार पर उपनिरीक्षक पद पर पदोन्नत हुए। विभाग में उन्हें अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठ और जिम्मेदार पुलिसकर्मी के रूप में जाना जाता था।

पुलिस लाइन में पार्थिव शरीर पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। परिजनों के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी भावुक नजर आए। पुलिस अधीक्षक ने स्वयं कंधा देकर अपने साथी को अंतिम विदाई दी। इस दौरान मौजूद हर आंख नम थी।

पुलिस विभाग ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में पूरा पुलिस परिवार परिजनों के साथ खड़ा है।

तनाव में हों तो अकेले न रहें

इस दुखद घटना के बीच पुलिस विभाग और समाज के लिए मानसिक तनाव के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश भी सामने आया है। पुलिस सेवा में कार्यरत कर्मियों पर लंबे समय तक ड्यूटी, जिम्मेदारियों और मानसिक दबाव का असर पड़ सकता है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को तनाव, अकेलापन या अत्यधिक मानसिक दबाव महसूस हो तो उसे अकेले रहने के बजाय परिवार, मित्र, सहकर्मी या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से बात करनी चाहिए। जीवन अनमोल है और किसी भी कठिन परिस्थिति में मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस है।

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