नेत्र कुंभ-2025 का भव्य समापन: गोरखपुर के स्वयंसेवकों की ऐतिहासिक वापसी।

नेत्र कुंभ-2025 का भव्य समापन: गोरखपुर के स्वयंसेवकों की ऐतिहासिक वापसी।

गोरखपुर,

 प्रयागराज में आयोजित नेत्र कुंभ-2025, विश्व के सबसे बड़े अस्थायी नेत्र चिकित्सा शिविर का 55 दिनों के बाद शानदार समापन हो गया। इस महायज्ञ में अपनी निःशुल्क सेवाएं देने के लिए गोरखपुर से गए श्री साईं नेत्रालय, गोरखनाथ और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ऑप्टोमेट्रिस्ट स्वयंसेवकों की टीम शनिवार, 4 जनवरी 2025 को रवाना हुई थी और अब गोरखपुर लौट आई है। इन स्वयंसेवकों ने अपने साथ नेत्र जांच उपकरण जैसे ट्रायल बॉक्स, विजन चार्ट, रेटिनोस्कोप के अलावा डॉ. शिव शंकर शाही, प्रांत अध्यक्ष, सक्षम, गोरक्ष प्रांत द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई अत्याधुनिक कम्प्यूटराइज्ड मशीनें – दो ऑटो रिफ्रैक्टोमीटर और दो स्लिट लैंप – ले जाकर सेवा कार्य को और प्रभावी बनाया।

सेवा का अनुपम योगदान

55 दिनों तक चले इस शिविर में इन स्वयंसेवकों ने अपनी-अपनी संस्थाओं की ओर से अलग-अलग ओपीडी का संचालन किया। इस दौरान 2,37,169 लोगों की नेत्र जांच, 1,62,925 चश्मों का वितरण और 17,038 मरीजों को ऑपरेशन के लिए चिन्हित किया गया। यह सेवा कार्य इतना व्यापक और प्रभावशाली रहा कि इसे भारत बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में विश्व के सबसे बड़े अस्थायी नेत्र स्वास्थ्य शिविर के रूप में दर्ज किया गया। नेत्र कुंभ-2025 ने संयुक्त राष्ट्र के 17 में से 12 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को छूकर वैश्विक स्तर पर मानवीय सेवा का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।

महाकुंभ का सबसे बड़ा सेवाकार्य

नेत्र कुंभ-2025 को स्वयंसेवकों, डॉक्टरों, चिकित्सा विशेषज्ञों, तकनीकी टीम, मीडिया और समाजसेवियों की अथक मेहनत ने ऐतिहासिक बनाया।

 यह शिविर भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ विदेशों से आए 1500 से अधिक लाभार्थियों तक पहुंचा, जिनमें भारतीय उपमहाद्वीप, यूरोप और अमेरिका के लोग शामिल थे। यह समर्पण, विज्ञान और समाज के एकीकरण का अनूठा उदाहरण बन गया।

गोरखपुर की टीम की भूमिका

श्री साईं नेत्रालय और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्वयंसेवकों ने न केवल तकनीकी कौशल से मरीजों की सेवा की, बल्कि अपनी संवेदनशीलता और निःस्वार्थ भाव से लोगों के दिलों में जगह बनाई। डॉ. शिव शंकर शाही ने कहा, “यह सेवा कार्य हमारी संस्कृति और मानवता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। गोरखपुर की टीम ने जो योगदान दिया, वह अभूतपूर्व है।” उनकी ओर से उपलब्ध कराई गई अत्याधुनिक मशीनों ने जांच प्रक्रिया को तेज और सटीक बनाया, जिससे लाखों लोगों को लाभ हुआ।

समाज से मिला अपार समर्थन

इस पवित्र कार्य में सहयोग देने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए डॉ. शाही ने कहा, “यह सफलता उन सभी की है, जिन्होंने तन-मन-धन से इसमें योगदान दिया।” इस आयोजन ने साबित कर दिया कि जब सेवा और विज्ञान एक साथ आते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

नेत्र कुंभ-2025 का समापन न केवल एक आयोजन का अंत है, बल्कि मानव सेवा के एक नए युग की शुरुआत है। गोरखपुर की टीम की वापसी के साथ ही इसकी गूंज देश-विदेश में फैल गई है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

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