जिला कारागार में भाई-बहन के रिश्ते की दिखी भावुक तस्वीर रक्षाबंधन पर 1408 लोगों ने की बंदियों से मुलाकात, 1113 बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी

जिला कारागार में भाई-बहन के रिश्ते की दिखी भावुक तस्वीर

रक्षाबंधन पर 1408 लोगों ने की बंदियों से मुलाकात, 1113 बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी

गोरखपुर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर शुक्रवार को जिला कारागार गोरखपुर में भाई-बहन के प्रेम और भावनाओं की मार्मिक तस्वीर देखने को मिली। जेल में निरुद्ध बंदियों से मिलने के लिए बड़ी संख्या में उनके परिजन पहुंचे। बहनों ने अपने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखद भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। लंबे समय बाद भाई से मिलने पहुंचीं कई बहनें भावुक भी नजर आईं।

मुलाकातियों की सुविधा को देखते हुए जेल प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे। कारागार के बाहर टेंट, कुर्सी, कूलर और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई थी। वहीं जेल के भीतर बहनों के लिए निःशुल्क राखी, मिठाई और रोली उपलब्ध कराई गई, ताकि कोई बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने से वंचित न रहे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अतिरिक्त महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई।

10 पालियों में हुई मुलाकात

रक्षाबंधन पर मुलाकात का सिलसिला सुबह करीब 7:30 बजे से शाम पांच बजे तक चला। कुल 10 पालियों में आयोजित मुलाकात के दौरान 1408 लोगों ने अपने बंदी परिजनों से मुलाकात की। इनमें 1113 महिलाएं, 271 बच्चे और 24 पुरुष शामिल रहे।

बहनों ने भाइयों को राखी बांधी और मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। भाइयों ने भी बहनों के प्रति स्नेह जताते हुए उनके सुख और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुलाकात के दौरान जेल परिसर में भावनाओं से भरा माहौल रहा।

सुरक्षा के साथ चिकित्सा व्यवस्था भी रही उपलब्ध

कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जेल प्रशासन की ओर से विशेष सतर्कता बरती गई। किसी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. विनय राय के नेतृत्व में चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध रही।

जेल अधीक्षक डीके पाण्डेय और जेलर कुंज बिहारी सिंह ने जेल रेडियो के माध्यम से बंदियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। डिप्टी जेलर विजय कुमार, आदित्य कुमार, कृष्णकुमारी समेत कारागार के अन्य कर्मचारी व्यवस्थाओं को लेकर मुस्तैद रहे।

जेल प्रशासन के अनुसार पूरे आयोजन के दौरान शांति और सौहार्द का माहौल बना रहा। रक्षाबंधन के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल में निरुद्ध होने के बावजूद बंदियों के पारिवारिक और मानवीय रिश्तों को संवेदनशीलता के साथ जोड़े रखा जा सकता है।

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