कुशीनगर में अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम 2.0 से बढ़ी जागरूकता।
कुशीनगर। पुलिस अधीक्षक कुशीनगर ने “छात्र पुलिस अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम 2.0” के तहत एक अनूठी पहल की, जिसमें छात्र-छात्राओं को पुलिस कार्यालय में आमंत्रित कर पुलिस की कार्यशैली और प्रशासनिक कार्यों के बारे में जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन जनपद कुशीनगर में उदित नारायण डिग्री कॉलेज पडरौना और बुद्ध पीजी कॉलेज कसया (राष्ट्रीय सेवा योजना) के छात्रों के लिए किया गया। छात्रों ने पुलिस कार्यालय का भ्रमण किया और वहाँ विभिन्न शाखाओं में होने वाले कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर नोडल अधिकारी क्षेत्राधिकारी सदर, सहायक नोडल अधिकारी, अन्य कर्मचारी, स्कूल-कॉलेज के शिक्षक और छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में छात्रों को अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से कानून और आपराधिक प्रक्रिया, अपराध अनुसंधान, यातायात नियंत्रण, साइबर अपराध, मानव तस्करी और कानून व्यवस्था जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें नेतृत्व, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करते हुए पुलिस की भूमिका को समझाया गया। इसके बाद छात्रों को हल्का जलपान कराया गया और पुलिस कार्यालय की विभिन्न इकाइयों जैसे लोक शिकायत प्रकोष्ठ, मानवाधिकार कक्ष, रिट कक्ष, निगरानी कक्ष, साइबर थाना और महिला सहायता प्रकोष्ठ का दौरा कराया गया। साथ ही, कोतवाली पडरौना से नोडल उपनिरीक्षक आकाश वर्मा और थाना कसया से नोडल निरीक्षक विज्ञानकर सिंह ने थानों का भ्रमण कराकर वहाँ होने वाले दैनिक कार्यों से अवगत कराया।
नोडल अधिकारी क्षेत्राधिकारी सदर और सहायक नोडल अधिकारी ने साइबर अपराधों जैसे धोखाधड़ी योजनाएँ, एपीके फाइल धोखाधड़ी, डिजिटल गिरफ्तारी, अज्ञात नंबरों से कॉल के जरिए होने वाली ठगी, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से फोटो-वीडियो संपादन कर की जाने वाली धोखाधड़ी के बारे में बताया। इनसे बचने के उपाय सुझाए गए और साइबर शिकायतों के लिए सरकारी हेल्पलाइन नंबर 1930 की जानकारी दी गई। इसके अलावा, थानों पर होने वाली जनसुनवाई और महिला संबंधी शिकायतों के लिए बने महिला सहायता डेस्क के कार्यों से भी छात्रों को परिचित कराया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को पुलिस के अधिकारों और कर्तव्यों की गहरी समझ देना था। पुलिस की औपनिवेशिक काल से चली आ रही नकारात्मक छवि को बदलकर उसे समाज में एक सहयोगी और जिम्मेदार संस्था के रूप में स्थापित करने की कोशिश की गई। यह पहल युवा पीढ़ी और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद करेगी। यह न केवल छात्रों को पुलिस कार्यों की जटिलताओं से रूबरू कराएगा, बल्कि उन्हें समाज में सुरक्षा और शांति बनाए रखने के प्रयासों में योगदान देने के लिए भी प्रेरित करेगा।















