शाबाशी ने मारी दंड पर बाजी।

शाबाशी ने मारी दंड पर बाजी।

संतकबीरनगर।

जिले में पुलिस कर्मियों के लिए पुरस्कार और दंड का लेखा-जोखा बेहद रोचक रहा है। बीते एक साल में जहां दंड पाने वाले पुलिस कर्मियों की संख्या सीमित रही, वहीं अच्छे कार्यों के लिए इनाम पाने वालों का ग्राफ 40 फीसदी अधिक रहा। आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में पांच पुलिस कर्मियों को दीर्घ दंड और 90 को लघु दंड मिला, जबकि 22 इंस्पेक्टर सहित 217 पुलिस कर्मियों को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया गया। इनाम का अनुपात 69.55 फीसदी रहा, जो दंड के 30.44 फीसदी से कहीं आगे है। पुलिस अधीक्षक सत्यजीत गुप्ता ने अब तक करीब नौ लाख रुपये नकद पुरस्कार वितरित किए हैं, जिससे कर्मियों का हौसला बढ़ा है।  

उत्तर प्रदेश पुलिस को अनुशासित बल माना जाता है, और जिले में इसे बनाए रखने के लिए एसपी सत्यजीत गुप्ता सख्ती बरतते हैं। उनके दो साल से अधिक के कार्यकाल में अनुशासन तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई हुई। उदाहरण के तौर पर, कार्यभार संभालते ही 17 थाना प्रभारियों के कारखास पुलिस कर्मियों को चिह्नित कर लाइन हाजिर किया गया और उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया। पासपोर्ट सत्यापन में हेराफेरी और भ्रष्टाचार के मामले में तीन पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज कर जेल भेजा गया। डांडिया कांड, नंदिनी राजभर हत्याकांड, और पेट्रोल पंप डकैती जैसे मामलों में लापरवाही बरतने वाले इंस्पेक्टरों को निलंबित किया गया। कुल मिलाकर, 51 पुलिस कर्मियों को परिनिंदा और 30 की सत्यनिष्ठा संदिग्ध मानी गई।  

दूसरी ओर, बेहतर ड्यूटी, हत्या, लूट, डकैती जैसी बड़ी घटनाओं का पर्दाफाश, और चोरी हुए सामानों की बरामदगी जैसे कार्यों के लिए पुलिस कर्मियों को सम्मानित किया गया। नंदिनी राजभर हत्याकांड, हाईवे डकैती, बखिरा लूट, और बेलहर में साढ़े छह लाख की लूट जैसे मामलों को सुलझाने वाली टीमों को पुरस्कार मिला। वर्ष 2024 में 22 इंस्पेक्टर, 21 सब इंस्पेक्टर, 48 मुख्य आरक्षी, और 216 आरक्षियों को सम्मानित किया गया।  

एसपी सत्यजीत गुप्ता ने कहा, “न्याय की नीति है कि अच्छे कार्यों के लिए पुरस्कार और गलतियों के लिए दंड दिया जाए। हम इसी सिद्धांत पर चलते हैं।” उनकी सख्ती से जहां लापरवाह कर्मियों में सुधार की उम्मीद जगी है, वहीं मेहनती पुलिसकर्मियों का मनोबल भी ऊंचा हुआ है।

 

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