एक व्यक्ति, दो नाम और दो पिता! डीएम के दरबार में फिर पहुंचा मामला मुकदमा दर्ज होने के बाद चार्जशीट भी दाखिल, ग्राम सचिव की भूमिका पर उठे सवाल; पुराने प्रार्थना पत्रों का मांगा हिसाब

एक व्यक्ति, दो नाम और दो पिता! डीएम के दरबार में फिर पहुंचा मामला

मुकदमा दर्ज होने के बाद चार्जशीट भी दाखिल, ग्राम सचिव की भूमिका पर उठे सवाल; पुराने प्रार्थना पत्रों का मांगा हिसाब

गोरखपुर। जनता दर्शन में बुधवार को जिलाधिकारी दीपक मीणा के सामने पिपराइच क्षेत्र से पहुंची महिला की शिकायत ने एक पुराने और गंभीर मामले को फिर चर्चा में ला दिया। महिला ने आरोप लगाया कि एक ही व्यक्ति अलग-अलग स्थानों पर अलग नाम और पिता के नाम का इस्तेमाल कर रहा है। शिकायत के अनुसार, संबंधित व्यक्ति गोरखपुर में एक नाम से और दूसरे प्रदेश में दूसरे नाम से नौकरी कर रहा है। मामले में मंडलायुक्त के निर्देश पर मुकदमा दर्ज होने और पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल किए जाने की बात भी सामने आई।

फरियादी ने डीएम को बताया कि मामले की जानकारी पहले ही प्रशासन के संज्ञान में आ चुकी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर शिकायत का अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। उसने संबंधित ग्राम सचिव और कुछ अन्य अधिकारियों पर कथित रूप से आरोपी व्यक्ति का सहयोग करने और अभिलेखीय प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया।

शिकायत सुनने के दौरान डीएम ने मामले की जानकारी ली और अधिकारियों से पूछा कि पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्रों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने यह भी जवाब तलब किया कि शिकायत का निस्तारण नहीं होने के क्या कारण रहे। डीएम ने संबंधित अधिकारियों से फोन पर जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले का केवल कागजी निस्तारण नहीं किया जाए, बल्कि शिकायत में लगाए गए आरोपों और अभिलेखों की वास्तविक स्थिति की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। पूर्व में हुई कार्रवाई, उपलब्ध रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति की भी जांच करने को कहा गया।

शिकायत में ग्राम सचिव की भूमिका पर लगाए गए आरोपों की भी जांच की जाएगी। आखिर अभिलेखों में व्यक्ति की पहचान को लेकर कोई विसंगति है या नहीं और यदि है तो उसकी वजह क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

महिला ने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति ने अलग-अलग जगहों पर अलग पहचान का इस्तेमाल किया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो पहचान और अभिलेखों के साथ-साथ नौकरी से जुड़े तथ्यों की भी जांच का रास्ता खुल सकता है।

डीएम के निर्देश के बाद अब पूर्व शिकायतों की फाइल, उन पर हुई कार्रवाई और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। प्रशासन की जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि मामले में वास्तव में किस स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई।

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